पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव*

मानवता की सेवा के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में सनातन संस्कृति के गुरु के प्रति आस्था और विश्वास का महानतम पर्व गुरु पूर्णिमा महोत्सव बुधवार 29 जुलाई 2026 को संपूर्ण श्रद्धा, विश्वास एवं उत्साह के साथ बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। शिष्यों के कल्याणार्थ एवं विश्व शांति- सद्भावना के लिए आज के दिन विशेष रूप से प्रार्थना की जाती है, क्योंकि सनातन संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की बात कहती है, और संपूर्ण मानव समाज के हित की बात व कल्याण की बात कहती है। 318 वर्ष प्राचीन संत परंपरा में वर्तमान नवम् पीठाधीश्वर पूज्य सतगुरु संत डॉ युधिष्ठिर लाल जी के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में यह पर्व समग्र विश्व की मानवता की सेवा को समर्पित किया जाता है। गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय। बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताए।। तीन लोक नौ खंड में गुरु से बड़ा न कोई। ईश्वर भी यदि अवतार धारण कर इस धरा पर आते हैं तो वह भी गुरु के आज्ञा में रहकर गुरु की सेवा कर ज्ञान प्राप्त करते हैं ,चाहे राम अवतार हो, चाहे कृष्ण अवतार हो, भगवान जी ने ही गुरु के महत्व को जन सामान्य के सम्मुख रखा है। भगवान वेदव्यास जी के जन्मोत्सव को ही गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि व्यास जी ने सनातन धर्म के पूर्ण विकसित स्वरूप और निरंतरता के लिए ग्रंथों को रचकर अमूल्य आवश्यक योगदान दिया, उन्होंने वेदों को चार भागों में विभाजित किया उसके पश्चात् भी वेदों को स्पष्ट करने के लिए पुराणों की रचना की, महाभारत ,18 पुराण, श्रीमद् भागवत, ब्रह्म सूत्र, मीमांसा, अद्वितीय साहित्य दर्शन के ग्रंथों की रचना की, जिससे मानव (सनातन धर्म प्रेमी) अपने जन्म के रहस्य (धर्म के मर्म) को समझ सकें । वर्तमान पीठाधीश्वर संत डा. युधिष्ठिर लाल जी के करकमलों व्दारा एवं उनके पावन सानिध्य व मार्गदर्शन में शदाणी संत परंपरा के अष्टम अवतार सतगुरु संत गोविंद राम जी के श्री विग्रह को पंचामृत एवं गंगा जल से स्नान करा कर चरण वंदना की जाती है, तत्पश्चात भजन- कीर्तन, गुरु महिमा पर प्रवचन, आरती, प्रार्थना, अरदास सभी शिष्यों के कल्याण हेतु की जायेगी। पूरे दिन गुरु वंदना से संबंधित कार्यक्रम किए जायेंगे। कार्यक्रम प्रातः 9:00 बजे से लगातार रात्रि 8:00 बजे तक चलता रहेगा। देश के कोने-कोने से एवं विदेशों से श्रद्धालु इस अवसर पर आकर अपने श्रद्धा सुमन अपने गुरु के चरणों में अर्पित करते हैं। सेवा कार्यों के लिए प्रसिद्ध यह शदाणी दरबार, यह वर्ष सेवा वर्ष के रूप में परम पूज्यनीय पंचम् पीठाधीश्वर माता हासी देवी जी के 200 वें जन्म जयंती (गुप्त नवरात्रि शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 21 जुलाई) के उपलक्ष्य में मना रही है, मुख्य रूप से पिछले 72 दिनों से वृहद रूप में विभिन्न आयोजनों के माध्यम से सेवा कार्य किये जा रहे हैं जैसे कि, ज्ञानवर्धन के लिए पुस्तक वितरण, वृक्षारोपण, अन्ना वितरण, वस्त्र वितरण, मेडिकल सेवा के साथ दवाई वितरण, भोजन- भंडारा सेवा आदि सेवा के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रोफेसर ताराचंद मोहनानी। Ex.HOD.Chem.Engg.90399 82023 शदाणी दरबार तीर्थ, रायपुर
