जिस व्यक्ति के पास हजारों करोड़ की संपत्ति हो, अगर वही एक दिन अपनी पहचान और रुतबा पीछे छोड़कर सड़क पर बैठकर लोगों से मदद मांगे, तो शायद वह अनुभव जिंदगी की कई परतें खोल सकता है।
कुछ समय पहले साउथ में एक पिक्चर बनी थी जिसमें एक व्यक्ति जो बड़ा पैसे वाला होता है बड़ा उद्योगपति होता है उसकी मां बीमार हो जाती है अपने गुरु के पास जाता है गुरु उसे कहता है अगर तुम एक माह तक अपने पूरे रुतबे को छोड़कर एक भिखारी बनकर जिंदगी गुजारोगे और सड़कों पर भीख मांगोगे और जो पैसे मिलेंगे प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से पहले मंदिर के दान पैटी में डाल दोगे तो तुम्हारी मां अवश्य बच जाएगी वह बड़ा उद्योगपति अपनी मां के बचाने के लिए बिना किसी बताएं दूसरे शहर घूमते रहता है फटे पुराने कपड़े पहनकर भिखारी के संग रह कर भीख मांगता है और कितनी कमाई होती है सुबह 11:00 बजे से पहले मंदिर में दान पेटी में डाल देता है और फिर से खाली कटोरा लेकर भीख मांगने निकलता है शर्त यही थी कि वह किसे बतायागा नहीं कि वह कौन है वह एक फिल्म थी पर ऐसा ही एक हकीकत में नजारा मुंबई की सड़कों में देखने को मिला जो यह खबर आज का सोशल मीडिया में वह अन्य चैनलों में ज्यादा हाईलाइट हो गई है ऐसा एक उद्योगपति जनप्रतिनिधि अपने गुरु की बात को अनुसरण करते हुए अपने आप को भिखारी का गेटअप लिए मुंबई के सड़कों पर निकल पड़ा भीख मांगने और किसी भी ने भी नहीं पहचाना कि विधायक है और बड़ा उद्योगपति है करोड़पति है
महाराष्ट्र के BJP विधायक पराग शाह ने हाल ही में मुंबई में एक दिन भिखारी का रूप धारण करके बिताया। उन्होंने बताया कि यह फैसला उनके जैन गुरु नम्रमुनि महाराज की सलाह पर लिया गया था। करीब चार घंटे तक वह मुंबई की सड़कों पर रहे और लोगों से मदद मांगी। उनके मुताबिक, इस दौरान लोगों ने उन्हें कुल ₹84 दिए।
किसी ने मदद की, किसी ने नजरअंदाज किया तो किसी ने उन्हें झिड़क भी दिया। एक महिला ने उन्हें किचन में इस्तेमाल होने वाला सामान भी दिया, जिसे उन्होंने बाद में एक पुलिस अधिकारी को सौंप दिया। बाद में उन्होंने अपनी पहचान में उसी जगहों पर जाकर लोगों के व्यवहार को फिर से देखा।
पराग शाह की 2024 चुनावी शपथपत्र में घोषित कुल संपत्ति ₹3,383.06 करोड़ थी, जिससे वह भारत के सबसे अमीर विधायकों में शीर्ष पर हैं।
लेकिन सड़क पर बिताए उन कुछ घंटों ने उन्हें एक अलग तरह की दौलत दिखाई, वह सम्मान, जो बिना किसी पद, पैसे या पहचान के सिर्फ इंसान होने के नाते मिलता है। शायद कभी-कभी जिंदगी को समझने के लिए हमें अपनी पहचान से बाहर निकलकर दुनिया को देखना पड़ता है।
