– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। बारिश के मौसम में सब्जियों की बढ़ती कीमतों से पहले ही परेशान आम उपभोक्ताओं की रसोई का जायका अब अदरक और लहसुन ने भी बिगाड़ दिया है। बाजार में दोनों की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। हालात यह हैं कि सामान्य गुणवत्ता का अदरक 200 से 250 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जबकि लहसुन 100 से 200 रुपये किलो तक बिक रहा है। महंगाई के चलते कई दुकानदार और ग्राहक भी इसकी ऊंची कीमतों को लेकर परेशान हैं। स्थानीय सब्जी कारोबारियों के मुताबिक, बारिश के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से सब्जियों की आवक पर असर पड़ा है। इसी वजह से बाजार में मांग के अनुरूप माल नहीं पहुंच पा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अदरक और लहसुन की कीमतों में तेजी के पीछे केवल परिवहन ही नहीं, बल्कि सीमित आवक और मौसम का भी बड़ा प्रभाव है।
सामान्य क्वालिटी का अदरक भी महंगा
बाजार में सामान्य गुणवत्ता का अदरक अब 200 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता का अदरक 250 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर थोक बाजार में भी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आवक में सुधार नहीं हुआ तो अदरक के दाम और बढ़ सकते हैं।
लहसुन की कीमत भी आसमान पर
लहसुन के दाम भी उपभोक्ताओं को राहत नहीं दे रहे हैं। खुले बाजार में लहसुन 100 से 200 रुपये किलो तक बिक रहा है। अच्छी गुणवत्ता के लहसुन की कीमत अपेक्षाकृत अधिक है। व्यापारियों के अनुसार बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में माल उपलब्ध नहीं होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
बढ़ती कीमतों से रसोई का बजट प्रभावित
अदरक और लहसुन रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा हैं। सब्जी, दाल, चटनी और अन्य व्यंजनों में इनका इस्तेमाल सामान्य रूप से होता है। ऐसे में दोनों के दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। गृहणियों का कहना है कि पहले से महंगी हो चुकी सब्जियों के बीच अदरक-लहसुन की कीमतों ने रसोई का खर्च और बढ़ा दिया है।
जमाखोरी और खराब होने का भी असर
व्यापारियों के मुताबिक बारिश के मौसम में अदरक-लहसुन सहित कई सब्जियों के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके चलते व्यापारी अतिरिक्त जोखिम उठाते हैं। वहीं बाजार में सीमित आवक के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कारोबारियों का कहना है कि यदि आवक सामान्य होती है और परिवहन व्यवस्था सुचारु रहती है तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।
छत्तीसगढ़ भी उत्पादन में पीछे नहीं, फिर भी महंगाई
अदरक और लहसुन के उत्पादन में छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, लेकिन स्थानीय बाजार में कीमतों पर बाहरी आवक, परिवहन लागत, मौसम और मांग का असर पड़ता है। यही वजह है कि उत्पादन वाले क्षेत्रों के बावजूद उपभोक्ताओं को ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है। फिलहाल बाजार में प्याज और आलू की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हैं, लेकिन अदरक और लहसुन की तेजी ने रसोई का बजट जरूर बिगाड़ दिया है। कारोबारियों का अनुमान है कि बारिश का दौर जारी रहने और आवक प्रभावित होने की स्थिति में आने वाले दिनों में इन दोनों के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
