– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। डॉक्टर बनने का सपना लेकर सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में एमबीबीएस की सीट पाने वाले अभ्यर्थियों के सामने अब मूल दस्तावेजों को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, जाति, निवास सहित अन्य जरूरी दस्तावेज जमा कराए जा रहे हैं। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी को काउंसिलिंग के अगले चरण में इससे बेहतर विकल्प वाले मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाती है और वह वहां प्रवेश लेना चाहता है, तो उसके लिए मूल दस्तावेज प्राप्त करना चुनौती बन सकता है।
प्रवेश के बाद मूल दस्तावेज जमा शासन की गाइडलाइन के अनुसार दस्तावेज जमा कराने का दावा
अभ्यर्थियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद वे भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए अगले चरण की काउंसिलिंग में भी शामिल होते हैं। यदि उन्हें किसी अन्य मेडिकल कॉलेज में बेहतर विकल्प मिल जाता है, तो वहां प्रवेश के लिए मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। ऐसे में पहले कॉलेज में जमा मूल प्रमाण-पत्र समय पर नहीं मिलने पर अभ्यर्थी के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
प्रवेश प्रक्रिया के साथ दस्तावेज सत्यापन पर भी सवाल
एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके बाद प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए मूल प्रमाण-पत्र कॉलेज में जमा कराने की व्यवस्था बताई जा रही है। अभ्यर्थियों की चिंता यह है कि यदि मूल दस्तावेज कॉलेज के पास सुरक्षित हैं, तो सीट अपग्रेड होने की स्थिति में उन्हें कितनी जल्दी वापस किया जाएगा और क्या निर्धारित समय के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकेंगे? अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि प्रवेश के समय दस्तावेज जमा कराने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए, जो काउंसिलिंग के आगामी चरणों में बेहतर कॉलेज या पसंदीदा सीट मिलने की उम्मीद रखते हैं।
जाति-निवास प्रमाण-पत्र को लेकर भी असमंजस
प्रवेश प्रक्रिया में जाति और निवास प्रमाण-पत्र सहित अन्य मूल दस्तावेजों को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच असमंजस बना हुआ है। उनका कहना है कि दस्तावेजों की मूल प्रति एक संस्थान में जमा होने के बाद दूसरे संस्थान में प्रवेश के समय उसकी आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए मूल दस्तावेजों की सुरक्षा और उन्हें वापस करने की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए।
‘गाइडलाइन के अनुसार ही जमा कराए जा रहे दस्तावेज’
वहीं सिम्स प्रबंधन की ओर से कहा जा रहा है कि एमबीबीएस प्रवेश की प्रक्रिया शासन की गाइडलाइन के अनुसार संचालित की जा रही है। अभ्यर्थियों से निर्धारित नियमों के तहत आवश्यक मूल दस्तावेज जमा कराए जा रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है और अभ्यर्थियों को प्रवेश प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
सीट अपग्रेड होने पर दस्तावेज लौटाने की व्यवस्था स्पष्ट हो
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यह है कि यदि किसी विद्यार्थी को काउंसिलिंग के अगले चरण में दूसरी जगह सीट मिलती है, तो उसके मूल दस्तावेज तत्काल लौटाने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यार्थियों का भविष्य दस्तावेजों से जुड़ा है और समय पर प्रमाण-पत्र नहीं मिलने से उनका अगला प्रवेश प्रभावित हो सकता है।मामला केवल दस्तावेज जमा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सीट अपग्रेड होने की स्थिति में मूल प्रमाण-पत्र कितनी जल्दी और किस प्रक्रिया के तहत वापस किए जाएंगे, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ-साथ इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
## – मूल दस्तावेजों में सभी प्रमाण-पत्र शामिल होते हैं और शैक्षणिक प्रमाण-पत्र नियमानुसार संस्थान में रखे जा रहे हैं। मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र को तहसील कार्यालय भेजा जा रहा है।
– डॉ. रमणेश मूर्ति
– डीन – सिम्स बिलासपुर
