– सुरेश सिंह बैस
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की ओर से बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगवाने के संबंध में नोटिस जारी किए जाने के बाद लोगों में चिंता और असमंजस की स्थिति बन गई है। विभाग द्वारा जारी पत्र में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की अधिसूचना का हवाला देते हुए उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करने को कहा गया है।
सीएसपीडीसीएल के पत्र में सीईए की अधिसूचना का हवाला, आपत्ति होने पर कार्यालय में उपस्थित होकर पक्ष रखने का निर्देश
साथ ही किसी प्रकार की आपत्ति होने पर निर्धारित समय के भीतर संबंधित कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का उल्लेख किया गया है। विभागीय नोटिस मिलने के बाद कई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की उपयोगिता, बिलिंग व्यवस्था और भविष्य में बिजली खर्च पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर बिजली बिल बढ़ने तथा बिलिंग संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ स्थानों पर उपभोक्ताओं द्वारा स्मार्ट मीटर का विरोध और प्रदर्शन किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति संबंधित मामलों और विभागीय जांच पर निर्भर करती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उन्हें इसकी कार्यप्रणाली, बिल निर्धारण की प्रक्रिया, रीडिंग व्यवस्था, शिकायत निवारण और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि जानकारी और संवाद के बजाय नोटिस के माध्यम से दबाव बनाए जाने से लोगों की आशंकाएं और बढ़ रही हैं।
पारदर्शिता की मांग
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि स्मार्ट मीटर व्यवस्था वास्तव में बिजली वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है, तो विभाग को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नए मीटर से बिलिंग किस आधार पर होगी और अधिक बिल आने की स्थिति में उपभोक्ता अपनी शिकायत कहां और किस प्रक्रिया के तहत दर्ज करा सकेंगे।
बिना हस्ताक्षर के पत्र ने भी खड़े किए सवाल
उपभोक्ताओं को दिए जा रहे कुछ पत्रों में अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने की बात भी सामने आई है। इससे नोटिस की औपचारिकता और प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं ने विभाग से मांग की है कि ऐसे पत्रों पर संबंधित अधिकारी का नाम, पद और हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को आधिकारिक सूचना की पुष्टि हो सके।उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उनकी आशंकाओं का समाधान और पूरी प्रक्रिया की जानकारी देना जरूरी है। इससे न केवल भ्रम की स्थिति दूर होगी, बल्कि बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
