– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। शहर को आवारा मवेशियों से मुक्त कराने के उद्देश्य से शुरू की गई गोकुलनगर योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है। नगर निगम की ओर से इस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की सड़कों और प्रमुख मार्गों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा बना हुआ है। कई इलाकों में सड़क किनारे डेयरियां संचालित हो रही हैं और पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है।
शहर में 50 से अधिक डेयरियां अब भी संचालित, 3400 पशुपालकों से शपथ पत्र के बावजूद समस्या बरकरार
नगर निगम ने वर्ष 2004-05 में गोकुलनगर योजना शुरू की थी। इसके लिए करीब 4 करोड़ रुपये खर्च कर लगभग 50 एकड़ जमीन पर 128 डेयरी संचालकों को प्लॉट आवंटित किए गए थे। योजना शुरू होने के बाद कुछ डेयरी संचालकों ने शहर से बाहर जाकर वहां डेयरी शुरू की, लेकिन कुछ समय बाद कई लोग फिर शहर में लौट आए। बताया जाता है कि कुछ आवंटित प्लॉट दूसरे लोगों को किराए पर दिए गए, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो गया। वर्तमान स्थिति यह है कि शहर के गोलबाजार, गोंड़पारा, सरकंडा, तेलीपारा, राजेंद्रनगर सहित कई मोहल्लों में सड़क किनारे गाय-भैंस पाली जा रही हैं। सुबह और शाम इन मवेशियों के सड़कों पर आ जाने से यातायात बाधित होता है। कई स्थानों पर इनके आसपास चारा-पानी की व्यवस्था भी सड़क किनारे ही की जाती है। कुछ जगहों पर मवेशियों के कारण छोटे कारोबार और डेयरी संचालन तक चल रहे हैं।
शहर में 50 से अधिक डेयरियां, घरों में भी बंधे मवेशी
नगर निगम के स्तर पर किए गए निरीक्षण में शहर में 50 से अधिक डेयरियां संचालित होने की बात सामने आई है। इनमें कई डेयरियां ऐसी हैं, जहां मवेशियों को घरों में ही बांधकर रखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को आवारा मवेशियों से मुक्त कराने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। मवेशियों को पकड़कर गोठानों और निर्धारित स्थलों पर भेजने की व्यवस्था भी की जा रही है, लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पा रही है।
3400 पशुपालकों से शपथ पत्र, फिर भी सड़क पर मवेशी
सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए निगम ने पशुपालकों से शपथ पत्र भी लिए हैं। अब तक करीब 3400 मवेशी मालिकों से शपथ पत्र भरवाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें पशुपालकों ने अपने मवेशियों को सड़क पर नहीं छोड़ने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद शहर में आवारा मवेशियों की समस्या कम नहीं हुई है।आंकड़ों के मुताबिक शहर में आवारा मवेशियों की संख्या करीब चार हजार से अधिक बताई जा रही है, जबकि सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों में जिलेभर में आवारा मवेशियों की संख्या करीब 30 हजार के आसपास बताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों का खुले में घूमना आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। पिछले डेढ़ साल में आवारा मवेशियों के हमलों और इनके कारण होने वाली दुर्घटनाओं में लोगों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
सड़क पर मवेशी छोड़ने पर होगी सख्ती
प्रशासन ने मवेशियों को सड़क पर छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद कई पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ रहे हैं। नगर निगम द्वारा मवेशियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई के बाद भी दूसरे स्थानों पर यही स्थिति दिखाई दे रही है।
अलग-अलग योजनाएं, लेकिन समाधान अब भी दूर
जिला प्रशासन के साथ नगर निगम अमला आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग योजनाओं पर काम कर रहा है। शहर के चारों ओर मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए बाड़े और अन्य व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि मवेशियों को सड़कों पर आने से रोका जा सके।गोकुलनगर योजना पर वर्षों पहले करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि शहर में फिर से सड़क किनारे डेयरियां और आवारा मवेशी दिखाई दे रहे हैं, तो यह योजना की निगरानी और क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करता है। अब जरूरत केवल नई योजना बनाने की नहीं, बल्कि पुरानी व्यवस्था की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने और सड़क पर मवेशी छोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।
