– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों प्रशासनिक अस्थिरता से जूझती नजर आ रही है। पिछले एक साल में जिले में तीन जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) का बदलाव हो चुका है। जून 2026 में रामेश्वर जसवाल ने प्रभारी डीईओ के रूप में जिम्मेदारी संभाली, लेकिन जुलाई में नियमित नियुक्ति होने तक डॉ. अजय कौशिक को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। लगातार हो रहे बदलाव का असर अब स्कूलों की नियमित समीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी पर दिखाई देने लगा है। जानकारी के अनुसार लगभग दो माह से प्राचार्यों की बैठक नहीं हुई है, जबकि स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा, समस्याओं के निराकरण और आगामी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए ऐसी बैठकें महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। वहीं 21 सितंबर से प्रारंभिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, जिसके लिए समय-सारिणी भी जारी हो चुकी है। ऐसे में प्रश्नपत्रों के पैटर्न, परीक्षा संचालन और तैयारियों की निगरानी को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
शिकायतों के निराकरण में भी देरी
शिक्षा विभाग के स्तर पर आने वाली शिकायतों के निराकरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन से संबंधित शिकायतों की रिपोर्ट तैयार होने के बाद कार्रवाई के आदेश का इंतजार किए जाने की बात सामने आई है। करीब 8 से 10 प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं। शिक्षा कार्यालयों में पहुंच रही शिकायतों के साथ डीपीआई से जारी आदेशों के क्रियान्वयन में भी देरी के आरोप हैं। इससे स्कूलों के निरीक्षण और जांच प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो साल में कई बार बदला नेतृत्व
बिलासपुर जिले में अक्टूबर 2023 से जनवरी 2025 तक डीईओ रहे टोपेश्वर प्रसाद का स्थानांतरण होने के बाद डॉ. अनिल तिवारी ने जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक डीईओ की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद शिकायतों और आरोपों के चलते उन्हें हटाकर विजय टांडे को 11 जुलाई 2025 को जिम्मेदारी दी गई। करीब 11 महीने बाद टांडे का भी स्थानांतरण हुआ। 12 जून 2026 को रामेश्वर जसवाल को फिर से जिम्मेदारी मिली, लेकिन इसके बाद 20 जुलाई 2026 को डॉ. अजय कौशिक को जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार सौंप दिया गया। खास बात यह है कि डॉ. कौशिक 31 अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में जिले को स्थायी डीईओ मिलने की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इससे विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन, परीक्षाओं की तैयारी और स्कूलों की निगरानी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सवाल यह कि निगरानी करेगा कौन?
शिक्षा व्यवस्था में बार-बार नेतृत्व परिवर्तन और स्थायी डीईओ का अभाव केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि सीधे तौर पर स्कूलों की कार्यप्रणाली से जुड़ा मामला है। जब मुखिया ही स्थायी नहीं है तो स्कूलों की नियमित समीक्षा, निरीक्षण, शिकायतों का त्वरित निराकरण और शासन के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन कौन सुनिश्चित करेगा?
दो माह से प्राचार्यों की बैठक नहीं, परीक्षा सिर पर
परीक्षा सिर पर है और विभागीय स्तर पर स्थायी नेतृत्व का अभाव बना हुआ है। ऐसे में अब जरूरत बैठकों में केवल व्यवस्था सुधारने की चर्चा की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।
