बिलासपुर। रविवार को पत्रकार कॉलोनी जाने वाले मार्ग पर एक बिल्डर के झंडे लगे दिखाई दिए। सड़क किनारे अचानक नजर आए इन झंडों ने क्षेत्र की जमीन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि झंडे पत्रकार कॉलोनी के भीतर नहीं, बल्कि पत्रकार कॉलोनी की ओर जाने वाले मार्ग पर लगाए गए हैं।
इस इलाके में पिछले कुछ समय से निजी प्लाटिंग का काम तेजी से दिखाई दे रहा है। ऐसे में पत्रकार कॉलोनी के मार्ग पर बिल्डर की मौजूदगी का संकेत देने वाले झंडे लगने से जमीन की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बिलासपुर प्रेस क्लब की ओर से लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि गृह निर्माण समिति की जमीन का सीमांकन स्पष्ट रूप से कराया जाए। सीमांकन होने से जमीन की वास्तविक सीमा सामने आ सकेगी और आसपास मौजूद सरकारी तथा निजी जमीन की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पत्रकार कॉलोनी के आसपास सरकारी जमीन का बड़ा क्षेत्र मौजूद रहा है। अब इस इलाके में तेजी से हो रही प्लाटिंग के बीच यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कौन सी जमीन किसके नाम दर्ज है और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है।
रविवार को मार्ग पर लगाए गए बिल्डर के झंडों ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है कि आखिर इस इलाके में जमीनों का स्वरूप किस दिशा में बदल रहा है?
स्थानीय स्तर पर अवैध प्लाटिंग के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई भी सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि पत्रकार कॉलोनी के आसपास जमीनों पर नई गतिविधियां दिखाई दे रही हैं, तो पूरे क्षेत्र का रिकॉर्ड और मौके की स्थिति एक बार फिर स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
पत्रकारों का कहना है कि सीमांकन किसी व्यक्ति या बिल्डर के विरोध का विषय नहीं है। इसका उद्देश्य सिर्फ इतना है कि जमीन की सीमा स्पष्ट हो और भविष्य में किसी तरह का विवाद पैदा न हो।अब देखना होगा कि पत्रकार कॉलोनी जाने वाले मार्ग पर लगाए गए इन झंडों के पीछे जमीन संबंधी क्या स्थिति है और प्रशासन इस पूरे मामले को किस नजरिए से देखता है।
फिलहाल रविवार को सामने आया यह दृश्य कई सवाल छोड़ गया है—जमीन किसकी है, सीमा कहां तक है और इस इलाके में आगे क्या होने वाला है?
