बताया जा रहा है कि मां की आखिरी इच्छा अपने बेटे से मिलने की थी, लेकिन वह उनसे मुलाकात नहीं कर सकीं। अंतिम संस्कार के बाद जेल लौटने से पहले चिन्मय कृष्ण दास मंदिर पहुंचे और श्रीकृष्ण के चरणों में फूट-फूटकर रो पड़े।
हिंदू अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले चिन्मय कृष्ण दास पर हत्या के मामले में आरोप लगाए गए हैं। उनके समर्थक इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा जिस व्यक्ति ने कभी किसी जीव को नुकसान नहीं पहुँचाया, उसे एक हत्या के मामले में झूठा फँसाया गया और बिना न्याय के जेल में डाल दिया गया।
एक बेटे का अपनी मां से आखिरी बार न मिल पाना और फिर कुछ ही घंटों में जेल लौट जाना बेहद पीड़ादायक तस्वीर है। सवाल यही है कि न्याय की प्रक्रिया में मानवीय संवेदनाओं के लिए कितनी जगह बची
