बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य मोहन मदवानी इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं। अपने बेटा-बहु और नाती पातों से मिलने पहुंचे श्री मदवानी पूरे पांच माह के लिए अमेरिका प्रवास पर हैं। इससे पूर्व भी वे अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने अपने यात्रा को निजी यात्रा बताते हुए कहा कि विदेशी धरती में जहां दिन में रात और रात में दिन का संघर्ष करना पड़ता है। वाशिंगटन में सुबह 6 बजता है तो भारत में समय 4 बजे का होता है। विदेशी संस्कृति और रहन सहन करना हर किसी के लिए आसान नहीं है।
बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का सस्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि विदेशी धरती में तिरंगा की शान और अपनी मिट्टी को संजोकन रखना खास मायने रखता है। अमेरिका के वाशिंटन में पहुंचे श्री मदवानी ने बताया कि अपनों से मिलने की लालसा और अपनों से दूर रहने की पीड़ा, दोनों का अलग-अलग अहमियत है। विदेशी धरती में जहां मान-सम्मान और प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला तो वहीं अपनों से दूर रहने की पीड़ा भी सता रही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका की राजधानी में वाइट हाउस और संसदीय कार्यप्रणाली को समझना जीवन का सबसे सुखद पहलू है। भारत की पत्रकारिता और अमेरिका की पत्रकारिता को समझने और परखने का सौभाग्य से अवसर मिला है। तेजी से बढ़ते इस दूनिया में बड़ी-बड़ी इमारतों के अलावा इतिहास की धरोहर को संजोकर रखना आज के दौर हर देश और प्रदेश के लोगों को संजोकर रखने की जरूरत है। अमेरिका के पहले राष्ट्रपति के नाम ऊंची इमारत है और यहां का राजनीतिक केन्द्र वाइंट हाउस दूनियाभर में मशहूर है। राजनीति के अलावा यहां के लोग समाज के उत्थान के लिए कैसे काम करते हैं, घर-परिवार के अलावा राजनीति में कैसे अहम भूमिका निभाते हैं, यह सब सीखने समझने को मजबूर कर रहा है। भारत की राजनीति में केवल सत्ता के पक्ष में हां में हां करना और ताली बजाने के लिए अलावा कुछ नहीं है, लेकिन विदेशी में हर संभव जन सरोकार के लिए काम करने को अहमियत दी जा रही है। इससे हमे सीख लेने की जरूरत है। मैं कोई सरकारी खर्च से अमेरिका प्रवास पर नहीं आया हूं। मेरे परिवार का आधा हिस्सा आज अमेरिका में जा बसा है , मैं उनके आग्रह पर आज यहां आया हुआ हूं। श्री मदवानी ने बताया कि उनके दो बेटे हैं बड़ा बेटा बिलासपुर में साथ में रहता है तो दूसरा बेटा अपने कैरियर की तलाश में अमेरिका में जा बसा है। मेरा प्यार और दुलार दोनों बेटे के लिए है इसलिए मैं अपने दूसरे नंबर के बेटे सुशील मदवानी के बुलावे पर दूसरी बार अमेरिका प्रवास पर हूं। मेरे साथ मेरी पत्नी श्री मती तारा माधवानी भी है। मुझे यह नहीं मालूम कि फिर से मुझे अमेरिका आने का मौका मिले, किंतु मुझे यहां आने का सौभाग्य मेरे अपने लोगों के कारण मिला है। मैं एक बार फिर से बिलासपुर के प्रेस क्लब के समस्त पदाधिकारी व सदस्यों को स्मरण करके सादर प्रणाम कर रहा हूं।
अपने जीवन काल की शुरूवात मोहन मदवानी ने सायकल रिपेयरिंग करके शुरू की। इसके बाद सिंधी कालोनी के लोगों ने उन्हें शेरा नाम दे दिया, जो आज भी प्रचलित है। लगातार मेहनत करके मोहन मदवानी ने अपने बच्चों की शिक्षा दीक्षा पर विशेष ध्यान दिया, आज इसी का परिणाम है कि उनका एक बेटा सुशील मदवानी अमेरिका में नौकरी कर रहा है।
