– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। रेंज साइबर थाने ने कमीशन के लालच में आम नागरिकों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी को अंजाम देने वाले एक संगठित म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। देश के अलग-अलग राज्यों में इस गिरोह द्वारा की गई करीब 4 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी के तार जुड़े हुए हैं, जिसकी पुष्टि देश भर से आई साइबर अपराध की 50 से अधिक शिकायतों से होती है। इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की मंगला शाखा में संचालित ‘अजय फार्म हाउस’ के नाम के एक संदिग्ध खाते से भारी-भरकम लेनदेन की जानकारी सामने आई। जांच में पता चला कि इस खाते में महज 25 दिनों (18 मई से 12 जून 2026 के बीच) के भीतर 2 करोड़ 20 लाख 68 हजार 443 रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। बैंक रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेजों, मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच के बाद पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में अजय कुमार सोनी (निवासी तखतपुर), अभिलाष कुमार डैनियल उर्फ चिंटू (निवासी जर्वेगाँव), भास्कर कश्यप (निवासी मंगला, बिलासपुर), नरेंद्र कुर्रे (निवासी बाराद्वार, जिला सक्ती), आशीष तिवारी (निवासी कोरबा) और देवेश कुमार दास उर्फ रॉबिन (निवासी रायपुर) शामिल हैं। पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण में इस बात का खुलासा हुआ है कि ये आरोपी सीधे तौर पर अपने खातों में ठगी की रकम लेने के बजाय, कमीशन का लालच देकर अन्य भोले-भाले लोगों के बैंक खाते हासिल करते थे। इसके बाद ठगी की रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी वास्तविक कड़ी को छिपाने का प्रयास किया जाता था। बैंक खातों के अलावा मोबाइल नंबर, एटीएम और अन्य बैंकिंग साधनों का उपयोग कर खातों में एप्लीकेशन सक्रिय करने तक इस नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की भूमिका तय थी। गिरोह के प्रत्येक सदस्य की कार्यप्रणाली और भूमिका इस प्रकार थी: * अजय कुमार सोनी अपने नाम से बैंक खाता खुलवाकर नेट बैंकिंग के लिए मोबाइल नंबर लिंक करवाता था और खाते से संबंधित जानकारी व बैंकिंग साधन दूसरों को उपलब्ध कराता था, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था। उसके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं। * अभिलाष कुमार डैनियल की भूमिका लोगों से संपर्क कर उन्हें बैंक खाता खुलवाने के लिए तैयार करने की थी। * नरेंद्र कुर्रे के माध्यम से बैंक खाता उपलब्ध कराने पर उसे 20 हजार रुपये कमीशन मिला था और वह खाताधारकों से संपर्क स्थापित करने का काम करता था। पुलिस के अनुसार इसके खातों से जुड़े लेन-देन पर करीब 2.8 प्रतिशत कमीशन देने की बात कही जाती थी। * भास्कर कश्यप ने खुद तो अजय के कहने पर बैंक खाता खुलवाया ही था, साथ ही उसके खाते से जुड़े 23 साइबर अपराध की शिकायतें सामने आईं और उसे इसके बदले 20 हजार रुपये कमीशन मिले थे।* आशीष तिवारी ने भी बैंक खाता उपलब्ध कराया, जिसके बदले उसे 25 हजार रुपये कमीशन मिलने की जानकारी सामने आई। इसके खाते से जुड़े 2 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं।
* देवेश कुमार दास उर्फ रॉबिन खातों में आवश्यक एप्लीकेशन डाउनलोड कर उन्हें ऑनलाइन गतिविधियों के लिए तैयार करता था।इस संगठित साइबर ठगी के तार देश के कई राज्यों तक फैले हुए हैं। चंडीगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान और झारखंड सहित कई राज्यों से इन खातों के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने के सबूत मिले हैं। यह पूरी कार्रवाई आईजी बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह के निर्देशन में, नodal अधिकारी गगन कुमार, थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा, कामिल हक सहित रेंज साइबर थाना के स्टाफ की सक्रिय भूमिका के तहत की गई है। वर्तमान में पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, टेलीग्राम चैट्स, व्हाट्सएप ट्रांजैक्शन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है तथा उन अन्य लोगों की भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है जो इनसे खाते लेते थे या ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर कराते थे।
