– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ी संस्कृति की खुशबू से सराबोर पारंपरिक पर्व ‘पोला तिहार’ इस शुक्रवार को नगर व आसपास के गांवों में बेहद उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।यह त्योहार केवल एक उत्सव भर नहीं है, बल्कि यह माटी के प्रति प्रेम, किसानों के सच्चे साथी बैलों के प्रति कृतज्ञता और हमारी समृद्ध लोक संस्कृति का एक जीवंत दस्तावेज है।
घर-घर गूंजी नन्हीं किलकारियां और सजी मिट्टी की बैलगाड़ियां
पोला पर्व के दिन सुबह से ही घरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। नन्हे-मुन्नों के हाथों में मिट्टी के सुंदर खिलौने और नन्हीं बैलगाड़ियां थमा दी जाती हैं।बच्चों ने सुबह-सुबह माटी से बने बैलों और पारंपरिक खिलौनों की पूरे विधि-विधान से पूजा की।पूजा के बाद बच्चों का उत्साह देखने लायक होता है, जब वे अपने इन खिलौनों के साथ गलियों में खेलते हुए नजर आते हैं।बालिकाओं ने भी मिट्टी के पारंपरिक खिलौनों के साथ खेलकर इस पर्व की खुशियों को दोगुना कर दिया।
रसोई से महकते ठेठरी-खुरमी और पारंपरिक पकवान
छत्तीसगढ़ी संस्कृति और खान-पान का जिक्र हो और मुंह में पानी न आए, ऐसा कैसे हो सकता है! पोला के इस खास मौके पर हर घर की रसोई में पारंपरिक पकवानों की महक चारों तरफ बिखर रही थी।विशेष तौर पर ठेठरी, खुरमी, और गुझिया जैसे लजीज पकवान तैयार किए गए।इन तमाम स्वादिष्ट व्यंजनों को मिट्टी के सुंदर बर्तनों में रखकर पूजा के दौरान भगवान और बैलों को भोग लगाया गया।
खेत-खलिहान और प्रकृति से गहरा नाता
यह पर्व उस वक्त आता है जब खेतों में धान की फसल लहलहाने लगती है और बालियां फूटने की प्रक्रिया शुरू होती है।पोला तिहार मूल रूप से किसान, खेत, खलिहान और प्रकृति के साथ हमारे आत्मीय और पारिवारिक रिश्ते का प्रतीक है।यह हमें याद दिलाता है कि हमारी सफलता और जीवन का आधार सीधे तौर पर प्रकृति और अन्नदाता की मेहनत से जुड़ा हुआ है।
जोश और रोमांच से भरी बैल दौड़ प्रतियोगिता
पोला पर्व की असली रौनक गांवों में लगने वाले मेलों और पारंपरिक प्रतियोगिताओं में दिखाई देती है। दोपहर ढलते ही गांवों में पारंपरिक बैल दौड़ प्रतियोगिता का रोमांचक आयोजन किया गया।किसानों ने अपने-अपने बैलों को सुंदर झूलों, घंटियों और रंगों से शानदार तरीके से सजाकर मैदान में उतारा।सज-धजकर मैदान में उतरे बैलों की दौड़ देखने और उसका आनंद लेने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए थे।
शालाओं में भी दिखा पोला तिहार का रंग
इस सांस्कृतिक पर्व का उल्लास स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में भी बखूबी देखने को मिला।विकासखंड मस्तूरी के ग्राम ओखर स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पोला तिहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के प्राचार्य रामेश्वर गुप्ता ने बहुत ही सुंदर बात कही कि छत्तीसगढ़ के अधिकांश तीज-त्योहार और परंपराएं सीधे तौर पर प्रकृति, किसान और कृषि जीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे लोकपर्व केवल उत्सव मनाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक बेहतरीन अवसर भी है।इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय परिसर में बच्चों ने मिट्टी के बैलों की पूजा की और शिक्षिकाओं व शिक्षकों नीलिमा सिंह, मोनिका डोंगरे, संगीता साहू, गंगा साहू एवं चंद्रिका प्रसाद जांगड़े का विशेष योगदान रहा।
