– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। शनिचरी बाजार में प्रतिबंधित ‘थाई मांगुर’ के कारोबार का मामला सामने आने के बाद मछली पालन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। गत दिवस विभाग की टीम ने बाजार क्षेत्र में दबिश देकर प्रतिबंधित एक्सोटिक मांगुर के मत्स्य बीज भारी मात्रा में जब्त किए। कार्रवाई के दौरान मछली विक्रेताओं को प्रतिबंधित प्रजातियों के पालन, बिक्री और परिवहन से दूर रहने की कड़ी हिदायत दी गई।
देशी मछलियों के लिए खतरा, बाजारों पर बढ़ाई निगरानी
मछली पालन विभाग के अनुसार प्रदेश में एक्सोटिक मांगुर (क्लेरियस गेरीपिनस) तथा बिग हेड (हाइपोप्थेलमिक्थीस नोबिलिस) जैसी प्रतिबंधित विदेशी प्रजातियों के पालन, संवर्धन, आयात-निर्यात, बिक्री, परिवहन और विपणन पर रोक है। इसके बावजूद इनके मत्स्य बीज और मछलियों के कारोबार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने बाजारों में निगरानी और निरीक्षण तेज कर दिया है। विभाग के उप संचालक ने बताया कि एक्सोटिक मांगुर को आम बोलचाल में ‘थाई मांगुर’ भी कहा जाता है। यह आक्रामक और मांसाहारी प्रजाति है, जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। इसके फैलाव से देशी मछली प्रजातियों के सामने भोजन और आवास को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने का खतरा रहता है।
25 हजार तक जुर्माने का प्रावधान
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित मछलियों का पालन अथवा कारोबार पाए जाने पर छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम, 1948 की धारा 5 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। प्रतिबंधित मछलियों के मत्स्य बीज और उनके भंडारण को नष्ट करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
कार्रवाई से मचा हड़कंप
शनिचरी बाजार में विभागीय टीम की कार्रवाई के बाद प्रतिबंधित मछली का कारोबार करने वालों में हड़कंप की स्थिति रही। विभाग ने विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित प्रजातियों की बिक्री या उसके बीज का भंडारण करते पाए जाने पर आगे सिर्फ समझाइश नहीं, बल्कि नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।मछली पालन विभाग ने संकेत दिया है कि प्रतिबंधित प्रजातियों के कारोबार पर रोक लगाने के लिए शनिचरी बाजार सहित शहर और जिले के अन्य संभावित ठिकानों पर भी निरीक्षण अभियान जारी रहेगा।
