अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़) |
अम्बिकापुर स्थित होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी के खिलाफ सोशल मीडिया और लिखित शिकायतों के जरिए भ्रम एवं दुर्भावनापूर्ण माहौल उत्पन्न करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में सामाजिक संगठन ‘मीडिया सम्मान परिवार’ (Media Samman Pariwar) ने कॉलेज की प्राचार्या को एक विस्तृत पत्र/ज्ञापन सौंपकर स्थिति स्पष्ट करने और कार्रवाई न करने का आग्रह किया है।
प्रमुख बिंदु एवं ज्ञापन का विवरण:
1. प्रो. अकील अहमद अंसारी का सामाजिक एवं शैक्षणिक परिचय:
ज्ञापन के अनुसार, प्रो. अकील अहमद अंसारी होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पदस्थ हैं। वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ एक जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में गरीब, असहाय, दलितों और पीड़ितों को निःशुल्क सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने एम.फिल. (डिजिटल क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन) की उपाधि प्राप्त की है और वर्तमान में पीएचडी के शोधार्थी हैं।
1. विवाद की पृष्ठभूमि एवं हालिया घटनाएं:
अनुपम वस्त्रालय मामला: हाल ही में अम्बिकापुर थाना क्षेत्र के ‘अनुपम वस्त्रालय’ में एक गरीब आदिवासी महिला के साथ हुए अत्याचार का मामला प्रकाश में आया था।
अकील सर की भूमिका: प्रो. अकील अंसारी ने सोशल मीडिया और वीडियो के माध्यम से इस घटना की जानकारी साझा की, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस विभाग द्वारा विवेचना अधिकारी (प्रधान आरक्षक) को निलंबित कर निष्पक्ष जांच शुरू की गई।
सीएआईटी (CAIT) उपाध्यक्ष पर टिप्पणी का आरोप: इसके बाद कैट (CAIT) उपाध्यक्ष सरगुजा द्वारा इस मामले में पीड़ित महिला के चरित्र पर सवाल उठाते हुए समस्त आदिवासी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इसके विरोध में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने कैट उपाध्यक्ष के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की मांग की।
1. दुर्भावनापूर्ण विरोध एवं छवि धूमिल करने की साजिश:
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई से नाराज होकर कुछ असामाजिक तत्वों और अपने हितों से बंधे समूहों द्वारा जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आरोपी को बचाना और प्रो. अकील अंसारी की सामाजिक छवि को धूमिल करना है।
1. अतीत की आड़ में महिला की निजता पर हमला:
पत्र में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि व्यक्तिगत रंजिश के तहत 16-17 वर्ष पुरानी किसी पुरानी घटना को पुनः सोशल मीडिया पर उछालकर भ्रामक माहौल बनाया जा रहा है।
संगठन का कहना है कि आज जो वर्ग सोशल मीडिया पर सबसे अधिक सक्रिय है, उनकी उम्र लगभग 30-32 वर्ष है—अर्थात 17 वर्ष पूर्व वे बच्चे थे और उन्हें उस समय की वास्तविक स्थिति का ज्ञान नहीं था।
बिना नाम लिए ऐसे संकेत देना कि लोग खोजबीन में जुट जाएं, उस महिला के सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन के लिए अत्यंत घातक और अन्यायपूर्ण है। किसी महिला के अतीत को हथियार बनाना और उसकी आबरू को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना न केवल अनैतिक है, बल्कि गंभीर सामाजिक अपराध भी है।
मांग एवं प्रतिलिपि प्रेषण:
‘मीडिया सम्मान परिवार’ ने प्राचार्या से नम्र निवेदन किया है कि ऐसे कपटपूर्ण एवं भ्रम फैलाने वाले व्यक्तिगत विरोध/शिकायतों का संज्ञान न लेते हुए संस्थान के गरिमापूर्ण वातावरण को बनाए रखने में अपना सहयोग प्रदान करें।
पत्र की प्रतिलिपि (Copy) निम्नलिखित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है:
1. सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), नई दिल्ली
2. संयुक्त सचिव, केंद्रीय क्षेत्रीय कार्यालय (भोपाल), मध्य प्रदेश
3. सचिव, उच्च शिक्षा विभाग (मंत्रालय भवन, नवा रायपुर)
4. आयुक्त, उच्च शिक्षा संचालनालय (नवा रायपुर)
5. कुलपति, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा (अम्बिकापुर)
6. आयुक्त, सरगुजा संभाग, अम्बिकापुर
7. कलेक्टर, सरगुजा (अम्बिकापुर)
8. संचालक/प्रबंधन मंडल (गवर्निंग बॉडी), होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज, अम्बिकापुर
(पत्र क्रमांक: MSPT/CG/2026/118 | दिनांक: 21/09/2026)
