आज *विश्व की मध्यिका आयु वर्ग (Median Age)*: लगभग ३१ से ३२ वर्ष है, जबकि विकसित राष्ट्रों (जैसे जापान, यूरोप और अमेरिका) में यह औसतन ४० से ५० वर्ष के बीच है, और भारत की औसत आयु लगभग २८से ३० वर्ष है।
जबकि *वैश्विक स्तर पर मनुष्य का औसत जीवन काल (जीवन प्रत्याशा)* लगभग ७३.५ वर्ष है, जबकि भारत में यह औसतन ७१से ७२.५ वर्ष के बीच है।मुख्य आंकड़े वैश्विक औसत: लगभग ७३.५ वर्ष (पुरुषों के लिए ~७१ वर्ष और महिलाओं के लिए ~७६ वर्ष)। भारतीय औसत: लगभग ७१.५से ७२.५ वर्ष *लिंग आधारित अंतर*:
भारत और दुनिया दोनों जगहों पर महिलाओं की औसत आयु पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक होती है।
*वैश्विक स्तर पर (अनुमानित)जेन जेड (Gen Z)*:
वैश्विक आबादी का लगभग २६% हिस्सा जेन जेड का है।
*जेन वाई (मिलेनियल्स) व जेन एक्स*: वैश्विक कार्यबल और आबादी का एक बड़ा हिस्सा मिलेनियल्स और जेन एक्स के बीच बंटा हुआ है, जिसमें मिलेनियल्स वैश्विक जनसंख्या का लगभग २१% से २३% और जेन एक्स लगभग १५% से २०% के आसपास है। *महिलाएं(Women)*: वैश्विक स्तर पर कुल जनसंख्या में महिलाओं का प्रतिशत लगभग ४९.५% से ५०% है।
*भारतीय स्तर पर प्रतिशत (अनुमानित)*: जेन जेड (Gen Z): भारत में दुनिया की सबसे बड़ी जेन जेड आबादी रहती है, जो कुल भारतीय आबादी का लगभग २७% से ३०% (लगभग ४५से ५० करोड़) हिस्सा है।
जेन वाई (मिलेनियल्स) व जेन एक्स: भारत एक युवा देश है, जहाँ मिलेनियल्स और जेन वाई आबादी का लगभग २५% से २७% हिस्सा बनाते हैं, जबकि जेन एक्स की हिस्सेदारी लगभग १८% से २०% दोनों का सम्मिलित आबादी २५+१८=४३÷२=२१.५ २७+२०=४७÷२=२३.५
अर्थात २१.५ से २३.५
महिलाएं (Women): भारत की कुल जनसंख्या में महिलाओं का प्रतिशत लगभग ४७% से ४९% (लगभग ४८.५% राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे/जनगणना अनुमानों के अनुसार) है। उक्त जनसांख्यिकी व औसत जीविता आंकड़ों के अधीन
आइये समझते हैं जेन जेड और आज की युवा पीढ़ी की दिशा व दशा। *जेन जेड युवा पीढ़ी*:
१९९७ से २०१२ के मध्य जन्मे लोगों का एक जनसांख्यिकीय समूह है।यह पीढ़ी मिलेनियल्स (जेन वाय) के बाद और जेनरेशन अल्फा से पहले आती है।
मुख्य विशेषताएं: *डिजिटल नेटिव*: यह पहली ऐसी पीढ़ी है जो जन्म से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के मध्य पली-बढ़ी है। *तकनीक से जुड़ाव*: इनके लिए कंप्यूटर, सोशल मीडिया और डिजिटल भुगतान रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहे हैं। *सोच और संस्कृति*: यह पीढ़ी अधिक खुले विचारों वाली,विविधता को अपनाने वाली और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक मानी जाती है।
*मिलेनियल्स या जेन वाई*:
१९८१ से १९९६ के बीच जन्मे लोगों की एक जनसांख्यिकीय पीढ़ी है।
यह पीढ़ी जनरेशन एक्स के बाद और जनरेशन जेड से पहले आती है। इन्हें ‘जेन वाई’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे जेन एक्स के ठीक बाद आए थे।मुख्य विशेषताएँ:
डिजिटल बदलाव के साक्षी:
इन्होंने दुनिया को एनालॉग (जैसे कैसेट, चिट्ठियाँ) से पूरी तरह डिजिटल (इंटरनेट, कंप्यूटर और स्मार्टफोन) होते देखा है।तकनीक-प्रेमी: यह पीढ़ी शुरुआती इंटरनेट, सोशल मीडिया और मोबाइल तकनीक से अच्छी तरह वाकिफ और सहज है।
संतुलन और लचीलापन: कार्यस्थल पर यह पीढ़ी काम और जीवन के बीच संतुलन, लचीलेपन और आपसी सहयोग को अधिक महत्व देती है। प्रमुख घटनाएँ:
इनके बड़े होने के दौरान ९/११का आतंकी हमला और २००८ की वैश्विक आर्थिक मंदी जैसी बड़ी घटनाएँ शामिल हैं, जिनका इनके कार्यवृत्त और जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। *जेनरेशन एक्स* (Generation X या Gen X) उन लोगों की पीढ़ी है जिनका जन्म सन १९६५और १९८० के बीच हुआ था।यह पीढ़ी ‘बेबी बूमर्स’ (Baby Boomers) के बाद और ‘मिलेनियल्स’ (Millennials) से पहले आती है। इन दोनों बड़ी पीढ़ियों के बीच होने के कारण इसे अक्सर ‘भुला दी गई पीढ़ी’ भी कहा जाता है।
मुख्य विशेषताएं:पृष्ठभूमि लचीला और स्वतंत्रता: इस पीढ़ी के लोग आत्मनिर्भर और स्वतंत्र स्वभाव के होते हैं। लैचकी किड्स (Latchkey Kids): इस दौर में माता-पिता दोनों के काम पर जाने और तलाक की दर बढ़ने के कारण ये बच्चे स्कूल से लौटकर अक्सर खाली घर संभालते थे।तकनीकी बदलाव के गवाह: जेन एक्स वह पहली पीढ़ी है जिसने अपने जीवनकाल में कंप्यूटर, केबल टीवी और इंटरनेट की शुरुआत को नजदीक से देखा है।
कार्यशैली: ये काम में लचीलेपन और संतुलन को पसंद करते हैं।
*बेबी बूमर्स (Baby Boomers)*: इनका जन्म १९४६ से १९६४ के बीच हुआ था।*साइलेंट जनरेशन (Silent Generation)*: इनसे भी पहले, यानी १९२८ से १९४५ के बीच जन्मे लोगों को इस नाम से जाना जाता है।
यदि साइलेंट जेनरेशन को छोड़ दिया जाये तो भी जेन जेड पीढ़ी की औसत ३०% की तुलना में जेन वाय,एक्स व वुमर्श की उपस्थिति लगभग २८ % होगी।जो जेन जेड को नियंत्रित करने व मार्गदर्शन करने में सक्षम हो सकता है।
अर्थात यदि जेन जेड का एक रुप जिसे जंतर-मंतर पर बताने की कोशिश की गई है वह वास्तविक नहीं है क्योंकि अभी हाल में दिल्ली विश्वविद्यालय व कर्नाटक में हुए विश्वविद्यालयीन तथा केरलम् में हुए महाविद्यालय छात्र संघ चुनावों में
राष्ट्र वादी जेन जेड ने बाजी मारी है अर्थात स्वच्छंदता वाली जेन जेड के प्रति युवा पीढ़ी आकर्षित नहीं हुई,जो
नवराष्ट्रवाद के लिए युवा पीढ़ी उर्वर भूमि के रूम में सिद्ध हुआ है। अंत में यह कहना उचित होगा कि जेन एक्स एवं वाय जेन जेड को सही मार्ग पर रखने अपने अभिभावकीय दायित्व बोध के प्रति जागरूक रहें व इसे परिवार, समाज तथा राष्ट्र के लिए एक नागरिक कर्तव्य मानते हुए संपूर्ण हृदय से निर्वहन करें ताकि युवा पीढ़ी स्वतंत्र उड़ान के हद से ऊपर जा कर जटायु-संपाती की तरह पंख न जला लें व मुंह के बल न गिर जाएं।
*पहले कर्तव्य फिर अधिकार*:
आज की युवा पीढ़ी भावी राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बनेंगे,अतः उन्हें अपने पूर्व की पीढ़ी से दिशा निर्देश व संस्कार लेते रहना उनका नैतिक कर्तव्य है।
-अंजनीकुमार तिवारी’सुधाकर’
