*शिव के साथ शक्तियों की आराधना – मन की बुराई रूपी रात्रि का अंत कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला दिव्य पर्व है शिवरात्रि एवं नवरात्रि* – *राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी*
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी द्वारा शिव गुलजार भवन तोरवा में क्लास कराने के दौरान शिवरात्रि एवं नवरात्रि के दिव्य रहस्य और परमात्मा के सत्य परिचय पर प्रकाश डाला गया।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी ने बताया कि सभी देवी-देवताओं की जयंतियां मनाई जाती हैं, परन्तु शिवरात्रि एवं नवरात्रि ही ऐसे पर्व हैं जिनमें ‘रात्रि’ शब्द जुड़ा रहता है, जिनकी रात्रि मनाई जाती है। यह कोई साधारण अंधकार की रात नहीं है। अंधकार रूपी रात्रि अर्थात मनुष्य के भीतर छुपी हुई बुराइयों – काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार रूपी रात्रि का अंत करने के लिए है। इस बुराई रूपी रात्रि का विनाश करने के लिए ही परमात्मा शिव का अवतरण और उनके साथ अष्ट शक्तियों का भी अवतरण होता है, इसलिए शिवरात्रि एवं नवरात्रि का विशेष महत्व है।
परमात्मा शिव निराकार ज्योति बिंदु हैं, जिनकी यादगार के रूप में भारत में शिवलिंग की पूजा होती है, जैसा कि चित्र में शिवलिंग के मध्य चमकते हुए सितारे के रूप में दर्शाया गया है।
उन्हें याद करने से परमात्मा शिव के गुण हमारे भीतर आने लगते हैं। वही परमात्मा दुःखहर्ता-सुखकर्ता, सृष्टि के रचयिता, सुख के सागर, ज्ञान के सागर, पवित्रता के सागर, आनंद के सागर और गीता ज्ञान दाता हैं। उन्हें याद करने से ही हमारे पाप भस्म होते हैं और भीतर की गंदगी खत्म होती है, आत्मा की मैल साफ हो जाती है।
परमात्मा हम सभी आत्माओं के परमपिता हैं। आत्मा हर किसी के भीतर है और आत्मिक नाते से केवल एक ही निराकार भगवान हम सबके पिता हैं।
वास्तव में निराकार को ही आज हर धर्म वाले परमात्मा के रूप में स्वीकार करते हैं। गुरु नानक जी ने भी कहा – ‘एक ओंकार निराकार’, ईसा मसीह जी ने भी कहा – ‘God is Light’, मुस्लिम धर्म में भी कहा गया – ‘नूर-ए-इलाही’ और हिन्दू धर्म की बात करें तो आज निराकार शिव के मंदिर पूरे भारतवर्ष में हर जगह सबसे ज्यादा मिलेंगे। तभी तो कहा जाता है – परमात्मा एक है।
परमात्मा गरीब नवाज हैं। वे उन बच्चों को विशेष प्यार देते हैं जिनके पास परमात्मा के लिए समय है और जो सच्चे दिल से उन्हें याद करते हैं। भक्ति में तो परमात्मा की महिमा है कि वे प्रेम के भूखे हैं, धन के नहीं। भक्तिमार्ग में सुदामा की मिसाल है – सुदामा ने दो मुट्ठी चावल प्रेम से देकर पूरे विश्व की बादशाही ले ली।
*शिवरात्रि एवं नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य -*
*शिवरात्रि का रहस्य -* परमात्मा शिव पर तीन बेलपत्र चढ़ाते हैं, वास्तव में ये तीन बेलपत्र तीनों देवों – ब्रह्मा, विष्णु, शंकर का प्रतीक हैं। परमात्मा शिव पर बेर अर्पित करते हैं – बेर अर्थात हमारे मन का जो बैर है वह खत्म हो जाए। दूध अर्पित करते हैं – दूध अर्थात पवित्रता की निशानी है, जीवन में पवित्रता आ जाए। दही अर्पित करते हैं – दही अर्थात जीवन में जो खटास है वह खत्म हो जाए। आक-धतूरा जैसे जहरीले पदार्थ अर्पित करते हैं – अर्थात अपने मन की गंदगी, कड़वाहट को परमात्मा को सम्पूर्ण रूप से अर्पित कर दें।
*नवरात्रि का रहस्य -* दुर्गा अर्थात दुर्गुणों का नाश करने वाली। परमात्मा शिव के साथ उनकी अष्ट शक्तियों की आराधना ही नवरात्रि है। ये अष्ट शक्तियां कोई बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर धारण करने वाले दिव्य गुण हैं – सहन करने की शक्ति, सामना करने की शक्ति, समेटने की शक्ति, समाने की शक्ति, परखने की शक्ति, निर्णय करने की शक्ति, सहयोग की शक्ति और विस्तार को समेटने की शक्ति। जब हम परमात्मा शिव को याद कर इन अष्ट शक्तियों को जीवन में धारण करते हैं, तभी भीतर छुपी महिषासुर रूपी बुराइयों का विनाश होता है और आत्मा शक्ति स्वरूपा बन जाती है।
*अब परमपिता परमात्मा शिव समझाते हैं – बच्चे मुझे याद करो तो तुम्हारे भीतर की खाद निकल जायेगी। परमात्मा की याद से हम सर्वगुण सम्पन्न बन जाते हैं।*
*भवदीय*
*प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, शिव गुलजार भवन तोरवा बिलासपुर |*
