फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में सुनाई गई सजा; दो साल बाद परिवार को मिला न्याय
रायपुर । सूरजपुर । विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरा हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित तीन दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) और चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता, अपराध की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इसे अत्यंत गंभीर अपराध माना।
सूरजपुर के प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय नाबालिग बेटी की नृशंस हत्या के इस मामले ने अक्टूबर 2024 में पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। हत्या के बाद मां-बेटी के शवों को घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर खेत में फेंक दिया गया था। अगले दिन दोनों के शव मिलने के बाद सूरजपुर में भारी आक्रोश फैल गया था।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत में हुई। अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया था। सजा के बिंदु पर अभियोजन और पीड़ित पक्ष की ओर से अधिकतम दंड की मांग की गई थी।
तीन दोषियों को फांसी, एक को आजीवन कारावास
अदालत ने मामले में चार दोषियों को निम्न सजा सुनाई—
* कुलदीप साहू — मृत्युदंड
* चंद्रकांत चौधरी — मृत्युदंड
* फूल सिंह उर्फ रिंकू — मृत्युदंड
* आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी — उम्रकैद/मरते दम तक कारावास
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सुरेश कुमार शर्मा ने मामले को अत्यंत जघन्य और गंभीर बताते हुए दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी।
13 अक्टूबर 2024 की रात हुई थी वारदात
यह पूरा मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक ड्यूटी पर थे। इसी दौरान उनके घर में उनकी पत्नी और 11 वर्षीय बेटी मौजूद थीं।
अभियोजन के अनुसार, मुख्य आरोपी कुलदीप साहू अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा। आरोप है कि पहले प्रधान आरक्षक की पत्नी के साथ दुष्कर्म किया गया और इसके बाद धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद नाबालिग बेटी को भी निशाना बनाया गया और उसकी भी हत्या कर दी गई।
वारदात के बाद दोनों शवों को वाहन में रखकर घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाया गया और खेत में फेंक दिया गया।
ड्यूटी से लौटे प्रधान आरक्षक ने देखा खून से सना घर
जब प्रधान आरक्षक रात में ड्यूटी से वापस घर पहुंचे तो घर के भीतर खून के निशान देखकर उनके होश उड़ गए। पत्नी और बेटी घर में नहीं थीं। फर्श और दीवारों पर खून के निशान थे।
उन्होंने दोनों की तलाश शुरू की, लेकिन रातभर उनका पता नहीं चल सका। अगले दिन दोनों के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर मिलने के बाद सनसनीखेज वारदात का खुलासा हुआ।
मां-बेटी की हत्या की खबर सामने आते ही सूरजपुर में भारी आक्रोश फैल गया।
आरोपी के घर और गोदाम के बाहर वाहनों में लगाई गई थी आग
मां-बेटी की हत्या के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे।
आक्रोश के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के घर और गोदाम के बाहर खड़े वाहनों में आगजनी की घटना भी हुई थी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र में मार्च भी किया था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए बाद में मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई गई।
हत्या से पहले पुलिसकर्मियों से हुआ था विवाद
जांच के दौरान वारदात से पहले की घटनाओं का भी उल्लेख सामने आया। पुलिस के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2024 की रात शहनाज अख्तर के जगराता कार्यक्रम के दौरान कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का नवापारा के कुछ युवकों से विवाद हुआ था।
इसके बाद पुलिस संदीप साहू को थाने लेकर गई थी। आरोप लगाया गया था कि वहां उसके साथ मारपीट हुई। इसी घटना को लेकर कुलदीप नाराज था। जांच के दौरान पुलिस ने इस विवाद को हत्या की घटना की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा था।
यह भी बताया गया कि मृतक प्रधान आरक्षक से कुलदीप का पुराना विवाद था।
वारदात से कुछ घंटे पहले पुलिसकर्मी पर खौलता तेल डालने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2024 की शाम कुलदीप साहू अपने साथियों आर्यन विश्वकर्मा, चंद्रकांत चौधरी और रिंकू सिंह के साथ सूरजपुर के पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में मौजूद था।
इसी दौरान आरक्षक घनश्याम सोनवानी की नजर कुलदीप पर पड़ी। कुलदीप को जिला बदर किए जाने के कारण उसे पकड़ने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इसी दौरान कुलदीप ने आरक्षक पर खौलता हुआ तेल डाल दिया और तलवार से हमला करने की धमकी देते हुए वहां से भाग गया।
इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने कुलदीप की तलाश शुरू कर दी थी।
पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश का भी आरोप
पुलिस के अनुसार, कुलदीप को पकड़ने के लिए हेड कॉन्स्टेबल सहित पुलिसकर्मी उसकी तलाश में निकले थे। इस दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की।
इसी घटनाक्रम के कुछ घंटे बाद वह प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा और इसके बाद मां-बेटी की हत्या की वारदात हुई।
जांच के दौरान पुलिस ने कुलदीप के साथ आर्यन विश्वकर्मा, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू की भूमिका सामने आने का दावा किया था।
पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने का भी आरोप
वारदात के बाद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू पर पुलिस टीम पर फायरिंग करने का आरोप भी लगा।
पुलिस के मुताबिक वह कार्रवाई से बचते हुए झारखंड की ओर भाग गया था। बाद में उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी गई। अंततः बलरामपुर पुलिस ने उसे बस से उतरते समय बस स्टैंड से गिरफ्तार किया।
मामले में पुलिस ने कुलदीप साहू के अलावा अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में अभियोजन चलाया गया।
29 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे चारों आरोपी
फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 29 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद अदालत में सजा के बिंदु पर बहस हुई।
पीड़ित पक्ष ने अपराध की जघन्यता, नाबालिग बच्ची की हत्या और मामले की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए दोषियों को अधिकतम सजा दिए जाने की मांग की।
इसके बाद अदालत ने सजा सुनाने के लिए तारीख निर्धारित की और अब तीन दोषियों को मृत्युदंड तथा एक दोषी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
फैसला सुनते ही भावुक हुआ पीड़ित परिवार
अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद प्रधान आरक्षक और उनके परिजन भावुक हो गए। करीब दो वर्ष से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया।
पीड़ित परिवार की ओर से कहा गया कि पत्नी और मासूम बेटी की हत्या के बाद परिवार जिस मानसिक पीड़ा से गुजरा, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। अदालत के फैसले से उन्हें न्याय मिलने का भरोसा मजबूत हुआ है।
परिजनों ने पुलिस विभाग, सहकर्मियों और कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा समय-समय पर परिवार का हालचाल लेने के लिए भी धन्यवाद दिया।
परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देते हैं तो वे भी कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे।
अदालत परिसर के बाहर दिखा भावनाओं का सैलाब
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर के बाहर पीड़ित पक्ष और उनके समर्थकों में भावनाओं का सैलाब दिखाई दिया। परिवार के सदस्यों की आंखों से आंसू छलक पड़े। फैसले के बाद लोगों ने आतिशबाजी कर अदालत के निर्णय का स्वागत किया।
दो साल से चले आ रहे इस मामले में अदालत के फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
अब रायपुर जेल शिफ्ट किए जा सकते हैं दोषी
फैसले के बाद अब अंबिकापुर सेंट्रल जेल में बंद कुलदीप साहू सहित अन्य दोषियों को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से यह प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विशेष रूप से कुलदीप साहू को जल्द रायपुर भेजे जाने की तैयारी है। रायपुर सेंट्रल जेल में फांसी की व्यवस्था उपलब्ध होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
हालांकि मृत्युदंड की सजा पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सक्षम उच्च अदालतों में अपील का अधिकार दोषियों को प्राप्त है। इसलिए अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के बाद भी अंतिम कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी रहेगी।
फैसले के बाद भी जारी रहेगी कानूनी लड़ाई
सूरजपुर का यह मामला केवल एक आपराधिक वारदात तक सीमित नहीं रहा। मां-बेटी की नृशंस हत्या के बाद जिस तरह पूरे जिले में आक्रोश देखने को मिला, उसने इसे प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया।
अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के बाद अगली नजर इस बात पर रहेगी कि दोषी पक्ष उच्च न्यायालय में क्या कानूनी कदम उठाता है और अपीलीय अदालत इस मामले में क्या निर्णय देती है।
सूरजपुर के इस दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला फिलहाल पीड़ित परिवार के लिए दो वर्षों के लंबे इंतजार के बाद न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
