घुरू में प्लॉटिंग के बीच सिकुड़ रहा सार्वजनिक रास्ता; मूर्ति विसर्जन और पर्व-आयोजनों में बढ़ सकती है परेशानी, नगर निगम ने जांच का दिया भरोसा
खबर अनिल शुक्ला की बिलासपुर से, :-
बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर के सकरी जोन क्रमांक-1 अंतर्गत घुरू वार्ड क्रमांक-4 में टुकड़ों में हो रही प्लॉटिंग के बीच सार्वजनिक भूमि और रास्तों पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। सैयदा मेंड्रा रोड से लगे प्रसिद्ध सगरा तालाब की मेढ़ पर नवनिर्मित मकान की बाउंड्रीवॉल बनाए जाने से सार्वजनिक आवागमन और धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग होने वाले स्थान के प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय स्तर पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सार्वजनिक उपयोग की भूमि की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
धार्मिक आयोजनों और मूर्ति विसर्जन का प्रमुख स्थल
सगरा तालाब की मेढ़ पर विभिन्न मंदिर, शिवालय और सार्वजनिक पूजा-पाठ के लिए चबूतरे बने हुए हैं। यहां रामनवमी और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर धार्मिक आयोजन होते हैं। सुहागिन पूजा के लिए चौराहा चबूतरा भी स्थित है। तालाब में मूर्ति विसर्जन के लिए घाट बना हुआ है, जहां पर्वों के दौरान लोगों की आवाजाही और भीड़ रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले तालाब की मेढ़ पर पर्याप्त खुली जगह उपलब्ध थी। यहां तक कि मूर्ति विसर्जन के लिए ट्रक, ट्रैक्टर और डंपर जैसे बड़े वाहन भी आसानी से पहुंच सकते थे। लेकिन मेढ़ के किनारे लगातार मकान बनने और हाल में एक नवनिर्मित मकान की बाउंड्रीवॉल से कथित तौर पर सार्वजनिक भूमि घिरने के कारण रास्ते की उपलब्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खसरा नंबरों में दर्ज भूमि की स्थिति की जांच जरूरी
उपलब्ध कराए गए राजस्व विवरण के अनुसार, खसरा नंबर 472 का रकबा 7.0330 हेक्टेयर बताया गया है। वहीं, खसरा नंबर 461 में सगरा तालाब का रकबा 2.2050 हेक्टेयर यानी लगभग 5.45 एकड़ बताया गया है। इसके अतिरिक्त खसरा नंबर 462 में तालाब की मेढ़ का रकबा 0.8170 हेक्टेयर यानी लगभग 2.02 एकड़ बताया गया है।
इन खसरों की वास्तविक सीमाओं, भूमि के राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का आधिकारिक मिलान कराया जाना जरूरी है। यदि मेढ़ की सार्वजनिक भूमि पर निजी निर्माण या बाउंड्रीवॉल का अतिक्रमण हुआ है, तो उसकी सीमा निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्लॉटिंग के बीच सार्वजनिक व्यवस्था पर सवाल
घुरू क्षेत्र में टुकड़ों में प्लॉटिंग और मकानों के निर्माण के बीच सार्वजनिक रास्तों, तालाब की मेढ़ तथा अन्य सामुदायिक उपयोग की भूमि की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। सवाल यह है कि निर्माण के दौरान संबंधित भूमि की सीमाओं का सत्यापन किया गया या नहीं? यदि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हुआ है, तो निर्माण के समय संबंधित विभागों की निगरानी कहां थी?
तालाब की मेढ़ केवल खाली जमीन नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों, मूर्ति विसर्जन और आम नागरिकों के आवागमन से जुड़ा सार्वजनिक स्थान है। ऐसे में कथित अतिक्रमण की अनदेखी भविष्य में विवाद और अव्यवस्था का कारण बन सकती है।
नगर निगम ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा
इस संबंध में सकरी जोन कार्यालय की अतिक्रमण शाखा के प्रभारी हितेश मक्कड़ से चर्चा की गई। उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है।
अब देखना होगा कि नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर बाउंड्रीवॉल और सगरा तालाब की मेढ़ की वास्तविक स्थिति का सीमांकन कराती है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण सार्वजनिक भूमि पर हुआ है अथवा निजी भूमि की वैध सीमा के भीतर है।
अब सवाल—क्या बच पाएगी सगरा तालाब की सार्वजनिक मेढ़?
नगर निगम को राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराकर कथित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ मूर्ति विसर्जन घाट, धार्मिक स्थलों और आम नागरिकों के आवागमन के लिए आवश्यक जगह सुरक्षित रखना जरूरी होगा। सगरा तालाब की मेढ़ का संरक्षण केवल राजस्व का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक सुविधा से भी जुड़ा विषय है।
