अमरावती
शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर भारत सरकार 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी करेगी। 22 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर लोकभवन में इसका विमोचन करेंगी। इसके साथ ही विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। कार्यक्रम में 200 से ज्यादा वीआईपी के साथ पूज्य शदाणी दरबार अमरावती से भी श्रद्धालु शामिल होंगे
दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका है। इससे देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों को गर्व महसूस होगा। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को अहम बताया।

35 ग्राम का होगा स्मारक सिक्का
प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत के मुताबिक सिक्के का निर्माण भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में किया जा रहा है। इसका वजन 35 ग्राम होगा।
सिक्का बनाने में:
50 प्रतिशत चांदी
40 प्रतिशत तांबा
5 प्रतिशत निकल
5 प्रतिशत जस्ता
का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह सिक्के में चांदी के साथ अन्य धातुओं का मिश्रण रहेगा।
बुकिंग की भी मिलेगी सुविधा
संत डॉ. युधिष्ठिर लाल के बेटे और दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की कई इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।
इसके अलावा कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उदय सांई ने कहा कि सिंधी समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है। स्मारक सिक्के के जरिए माता साहिब हासी देवी के योगदान और शदाणी दरबार की पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है।
शदाणी दरबार पीठ: 300 साल पुराना मठ
शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। इसके संस्थापक संत शदाराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे।
इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब प्रज्वलित की गई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी।
वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल इसके नौवें पीठाधीश्वर हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्य भी किए जाते
