पारंपरिक जनजातीय लोक कला से नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल – बच्चों एवं वयस्कों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग
बिलासपुर, 12 अक्टूबर 2026
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सांस्कृतिक संघ द्वारा कला एवं पारंपरिक लोक संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा नई पीढ़ी को भारतीय जनजातीय कला से जोड़ने के उद्देश्य से दिनांक 11 अक्टूबर 2026 को रेल क्लब, बिलासपुर में एक दिवसीय ‘वारली आर्ट वर्कशॉप’ का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में पांच वर्ष से अधिक आयु के बच्चों सहित वयस्क प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वारली कला की बारीकियों को सीखते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता श्री अरविंद मेश्राम, प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एवं अध्यक्ष, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सांस्कृतिक संघ ने की। इस अवसर पर श्रीमती शिवरंजनी पी. वर्मा, उपाध्यक्षा, सांस्कृतिक संघ; श्रीमती निकिता अग्रवाल, सचिव, सांस्कृतिक संघ; श्रीमती पारिजात सतपथी; श्रीमती प्राची मित्तल; श्रीमती अदिति दुबे सहित रेलवे के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई वारली कला की आकर्षक एवं कलात्मक कृतियों की प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी में पारंपरिक जनजातीय जीवन, प्रकृति, सामाजिक गतिविधियों तथा लोकजीवन से जुड़े विभिन्न दृश्यों को वारली कला की विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया गया। इन कलाकृतियों ने उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
इस अवसर पर सेक्रो अध्यक्षा श्रीमती मीनाक्षी शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में तथा सेक्रो सचिव श्रीमती वैशाली भटनागर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अतिथियों एवं अधिकारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रतिभागियों की कलात्मक अभिव्यक्ति, रचनात्मकता एवं उत्साह की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा वारली आर्ट के प्रशिक्षक श्री अरुण यादव, श्री राज साहू एवं उनकी पूरें सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही, कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को वारली कला की पारंपरिक शैली, ज्यामितीय आकृतियों के प्रयोग तथा जनजातीय जीवनशैली को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय लोक कला की विशिष्टताओं को समझने और स्वयं कलाकृतियां तैयार करने का अवसर मिला।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार की रचनात्मक कार्यशालाओं का उद्देश्य भारत की समृद्ध लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित करना, पारंपरिक कलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा बच्चों और युवाओं में कला के प्रति रुचि विकसित करना है। ऐसे आयोजन न केवल प्रतिभागियों की रचनात्मक क्षमता को निखारते हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। एक दिवसीय वारली आर्ट वर्कशॉप को सफल बनाने में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सांस्कृतिक संघ के पदाधिकारियों एवं सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।
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