
विजयापुरम में ब्रह्माकुमारीज द्वारा चैतन्य देवियों की अलौकिक झांकी ने जीता सबका दिल! 💫*जब धरती पर गूँजते हैं माँ के जयकारे, जब भक्तों के हृदय में जागती है श्रद्धा, जब दीपों की रोशनी में खिल उठती है भक्ति, तब साक्षात् दिव्यता का अनुभव कराती हैं माँ जगदम्बे की चैतन्य झाँकियाँ!*प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा विजयापुरम में चैतन्य देवियों की भव्य और अलौकिक झांकी का दिव्य आयोजन**कार्यक्रम स्थल – विजयापुरम, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)*नवरात्रि के पावन और पवित्र पर्व पर *प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा विजयापुरम, बिलासपुर (छ.ग.)* में चैतन्य देवियों की दिव्य, भव्य और अलौकिक झांकी का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ किया गया।इस अवसर पर माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती के चैतन्य स्वरूपों की जीवंत झांकी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा प्रस्तुत की गई, *जो राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से ही जागृत होती हैं।**दीप प्रज्वलन का अलौकिक दृश्य – मोबाइल टॉर्च से जगमगाए आत्मा के दीप*कार्यक्रम का शुभारंभ *स्वर्णिम एरा की मुख्य संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी* ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस दौरान एक अनोखा और भव्य दृश्य देखने को मिला जब *राखी दीदी जी के आह्वान पर उपस्थित सभी दर्शकगण ने अपने-अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर पूरे प्रांगण को रोशनी से जगमगा दिया।*राखी दीदी जी ने कहा – *”जैसे ये टॉर्च की रोशनी पूरे अंधेरे को मिटा देती है, वैसे ही जब हम आत्मा रूपी दीपक को राजयोग से जलाते हैं तो हमारे जीवन का अंधकार मिट जाता है और आत्मा टिमटिमाने लगती है। यही हम सबका असली दीप प्रज्वलन है।”*इस अलौकिक दृश्य से पूरा वातावरण दिव्यता और भक्ति से भर गया।*स्वर्णिम एरा की मुख्य संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी का दिव्य उद्बोधन*कार्यक्रम की मुख्य वक्ता *स्वर्णिम एरा की मुख्य संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी* ने कहा – “दुर्गा का अर्थ ही है – दुर्गुणों का नाश करने वाली। पितृपक्ष में पहले पूर्वजों को संतुष्ट करेंगे तब माता रानी घर पर आएंगी। घर में माँ जोड़ने का काम करती है। हर चीज़ नारी के भीतर छिपी हुई है। बिना शिव के शक्ति भी अधूरी है और शिव ना होता तो शक्तियाँ ना होतीं। *राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास द्वारा ही हमारे अंदर सुषुप्त पड़ी सारी शक्तियाँ जागृत होती हैं।* आँखें बंद करने का दिल नहीं होता, नवरात्रि आँखें खोलने का दिन है।”*मंच संचालन एवं राजयोगिनी पूर्णिमा दीदी जी का विशेष उद्बोधन*मंच का कुशल संचालन *राजयोगिनी पूर्णिमा दीदी जी* ने किया। उन्होंने कहा – “यदि मुख्य घर के आँगन में परमात्मा शिव को बिठाया जाए तो पूरा घर सुरक्षित रहता है। उन्हीं से ही उत्पन्न यह शक्तियाँ हैं जो अष्टभुजा धारी हैं और *राजयोग मेडिटेशन ही वह आधार है जिससे आत्मा में शक्ति भरती है।*”*गरिमामयी उपस्थिति एवं सम्मान*इस दिव्य कार्यक्रम में *अजय श्रीवास्तव जी – प्रसिद्ध बिल्डर विजयापुरम, उदय सोनी जी – लेखक, विजय यादव जी – पार्षद* सहित *लगभग 80 से 90 श्रद्धालु भाई-बहन* उपस्थित रहे।इस दौरान *अजय श्रीवास्तव जी, उदय सोनी जी एवं विजय यादव जी को परमात्मा के घर की ईश्वरीय सौगात, पवित्र प्रसाद एवं ईश्वरीय स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानपूर्वक सम्मानित किया गया एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष शुभकामनाएं दी गईं।*
