
भारतीय संस्कृति और एकजुटता की दिखी झलकएलन (टेक्सास, अमेरिका)। अमेरिका के टेक्सास राज्य के एलन शहर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में भारतीय समुदाय द्वारा विजयादशमी (दशहरा) का पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय शामिल हुए। पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गूंज उठा। उत्सव के दौरान भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामुदायिक एकजुटता का सुंदर संगम देखने को मिला।रामायण के प्रसंगों का सजीव मंचनकार्यक्रम में स्थानीय बाल, युवा और वरिष्ठ कलाकारों ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों का सजीव मंचन किया। माता सीता हरण और राम-रावण युद्ध के दृश्यों ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं, कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से शस्त्र पूजा संपन्न कराकर की गई। विभिन्न भारतीय राज्यों से आए लोगों ने उत्साहपूर्वक पूजा में भाग लिया।आतिशबाजी के बीच हुआ भव्य रावण दहनदशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण रावण दहन रहा। भगवान श्रीराम के स्वरूप में सजे बाल कलाकार ने जैसे ही रावण की नाभि पर तीर चलाया, भव्य आतिशबाजी के बीच रावण का विशाल पुतला धू-धू कर जल उठा। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया।भारतीय संस्कृति और एकजुटता की सराहनाकार्यक्रम की कवरेज कर रहे वरिष्ठ पत्रकार मोहन मदवानी ने कहा कि राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में भारतीय समुदाय की भारी उपस्थिति देखकर ऐसा लगा मानो पूरा वातावरण राममय हो गया हो। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी उन्नत तकनीक और विकास के लिए जाना जाता है, लेकिन विदेश में रह रहे भारतीयों का अपनी संस्कृति, परंपराओं और मातृभूमि के प्रति प्रेम इस तरह के आयोजनों को विशेष बनाता है। उन्होंने भारतीय समुदाय की एकजुटता को प्रेरणादायक बताया।पांच महीने के अमेरिकी प्रवास के बाद 1 नवंबर को लौटेंगे भारतवरिष्ठ पत्रकार मोहन मदवानी अपने अमेरिकी प्रवास के दौरान न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और वाशिंगटन सहित कई प्रमुख स्थानों का भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने विश्व व्यापार केंद्र और विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा फॉल्स की भी सैर की। पांच महीने के इस पारिवारिक प्रवास के दौरान उन्होंने अपने पुत्र सुशील मदवानी, बहू पूनम मदवानी, पोता-पोती और मित्रों के साथ यादगार पल बिताए। अब वे अपनी पत्नी के साथ 1 नवंबर को भारत लौटेंगे और अपने गृह नगर बिलासपुर, छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे।अमेरिका में आयोजित यह दशहरा उत्सव इस बात का प्रतीक बना कि भारतीय जहां भी रहते हैं, अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को पूरे उत्साह के साथ जीवंत रखते हैं।
