कबाड़ से जुगाड अथवा वेस्ट से बेस्ट को सूत्र वाक्य बना जन कल्याण का कार्य कर रही सामाजिक संस्था सेवा एक नई पहल द्वारा कोटा आश्रित ग्राम धनरास की एक शाला की बालिकाओं को सिलाई मशीन और इस्तेमाल हो चूके कपड़ो की कतरन उपलब्ध करवाई गई जिसे लेकर शाला की प्रयोग धर्मी व राज्य स्तरीय पुरुस्कारों से सम्मानित शिक्षिका दीप्ति दिक्षित के निरंतर प्रयासो से नई नई उपयोगी वस्तुए निर्मित की जा रही है ~
इन बालिकाओं और शिक्षिका को प्रोत्साहन देते हुए संस्था की संयोजिका रेखा आहुजा जी ने कहा महिलाओं का आत्म निर्भर न होना सामाजिक अभिशाप है और इसका एक मात्र उपाय स्व रोजगार है क्योंकि कोई भी सरकार चाह कर भी सबको नौकरी नहीं दे सकती इसलिए स्कूली शिक्षा में स्किल डेवलपमेंट को प्राथमिकता देकर नव रोजगार सृजन करे और हमारी संस्था इस ओर निरंतर प्रयास रत है।