बिलासपुर:- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिवशक्ति भवन रामाग्रीन सिटी एवं शिव गुलजार भवन तोरवा में जन्माष्टमी का पर्व बहुत हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक रहस्य के साथ मनाया गया तथा राजयोगिनी पूर्णिमा दीदी जी ने जन्माष्टमी का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा की श्री कृष्ण का जन्म रात्रि में दिखाया जाता है अर्थात जब इस घोर कलयुग रूपी रात्रि का अंत होता है तब श्री कृष्ण का जन्म होता है और एक नई दुनिया सतयुग का प्रारंभ होता है दूसरी ओर शास्त्रों में श्री कृष्ण जी को पीपल के पत्ते पर बैठकर अंगूठा चूसते हुए आते दिखाते हैं इसका रहस्य यह है कि जब सृष्टि विनाश की ओर बढ़ेगी तब एकमात्र खंड भारत ही बचेगा और सभी देश भारत में मिल जाएंगे इस प्रकार भारत पीपल के पत्ते के समान दिखाई देगा और भारत में सर्वप्रथम श्री कृष्ण का ही जन्म होगा इसलिए श्री कृष्ण को पीपल के पत्ते पर अंगूठा चुसता हुआ दिखाते हैं तथा श्री कृष्ण को मटकी तोड़कर माखन निकालते हुए दिखाते हैं इसका अर्थ यह है कि वर्तमान में हर किसी के अंदर अभिमान अत्यधिक है मटकी तोड़ने का अर्थ यह है कि हमें अपना अभिमान तोड़ देना है और मक्खन का अर्थ है ज्ञान जब हम अपने सारे अभिमान खत्म कर देते हैं तभी हमें मक्खन रूपी ज्ञान मिलता है तथा श्री कृष्ण को गोपिकाओं के साथ रास करते हुए दिखाते हैं उसमें सभी एक दूसरे के साथ डांडिया से खेल करते हैं इसका अर्थ यह है कि हमें सभी से आपस में अपने संस्कार मिलाकर चलना है रास का अर्थ है आपस में एक दूसरे के साथ संस्कारों का मिलन करना एवं श्री कृष्ण को गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाया हुआ दिखाते हैं और उसमें सभी की उंगली लगी हुई दिखाते हैं इसका अर्थ यह है कि जब नई दुनिया सतयुग की स्थापना हो जाएगी उसमें श्री कृष्ण के साथ अन्य देवी देवताएं भी निवास करेंगे इसलिए गोवर्धन पर्वत पर सहयोग की उंगलियां दिखाई गई है श्री कृष्ण की महिमा का वर्णन पूरे भारत में सभी करते हैं तथा जन्माष्टमी का अर्थ यह है कि श्री कृष्ण का सतयुग में आठ जन्म होता है इसलिए हम श्री कृष्ण के आठो जन्मो की पूजा करते हैं, इसलिए जन्माष्टमी के दिन आठ कन्हैया बनाते हैं तथा श्री कृष्ण को 16 कला संपूर्ण निर्विकार कहते हैं अर्थात सतयुग में सभी 16 कलाओं से संपूर्ण होते हैं जिनमें कोई विकार नहीं होता एवं श्री कृष्ण जी के लिए यह गीत भी गाते हैं श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा इसका अर्थ यह है कि बाल्यावस्था में श्री कृष्ण जी का नाम कृष्णा था फिर थोड़ी बड़े होने के बाद वह गोविंद बन जाते हैं और उनके हाथों में मुरारी अर्थात मुरली दिखाते हैं और जब वह थोड़ी और बड़े हो जाते हैं तब नारायण बन जाते हैं इस प्रकार राजयोगिनी बीके पूर्णिमा दीदी जी ने कृष्ण जन्माष्टमी का आध्यात्मिक रहस्य बताया और बड़े धूमधाम से जन्माष्टमी के वास्तविक रहस्य सहित यह पर्व मनाया गया
राजयोगिनी सरोज दीदी जी ने सभी को राजयोग कराया एवं लता दीदी जी अंजू दीदी जी ने भी सभी को भोग प्रसाद वितरण किया बीके शिवि एवं सुनयना दीदी ने भी उपस्थित लोगों को राजयोग का अभ्यास कराया बी के नीति ने रचनात्मक मेडिटेशन कराया साथ ही साथ गीत नृत्य एवं नाटक का भी आयोजन किया गया कार्यक्रम का संचालन बी के विधि ने किया, इस प्रकार उक्त कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
