बिलासपुर:- विजयदशमी के पावन अवसर पर देश भर में रावण दहन का कार्यक्रम का आयोजन किया गया रामलीला का आयोजन किया गया इसी कड़ी में हर वर्ष की तरह वार्ड नंबर 12 झूलेलाल नगर चक्करभाटा में रावण दहन का कार्यक्रम का आयोजन किया गया कार्यक्रम के पहले संत लाल सांई जी के द्वारा सत्संग कीर्तन करके साध संगत को निहाल किया आज के कार्यक्रम की शुरुआत भगवान रामचंद्र जी के भजन से की गई अनिल पंजवानी रवि रूपवानी वरुण साईं के द्वारा कई भक्ति भरे भजनों की शानदार प्रस्तुति दी जीसे सुनकर उपस्थित भक्तजन झूम उठे
रामजी की निकली सवारी रामजी की लीला है नाऐरी एक तरफ लक्ष्मण एक तरफ सीता बीच में बैठे हैं जगत के पालन हारी,
अब वह घड़ी आ गई जिसका सबको इंतजार था सांई जी के अमृतवाणी में ज्ञान रूपी सत्संग की अमृत वर्षा का सांई जी ने अपनी अमृतवाणी में सभी को विजयादशमी की बहुत-बहुत बधाइयां और शुभकामनाएं दी एक प्रसंग सुनाया छाया और रोशनी का जब भी सूरज की किरणें आती है तो उजाला फैल जाता है रोशनी हो जाती है पर छाया आती है तो सब ढक जाता है और जब फिर से सूर्य कि किरणें आती है तो चारों तरफ उजाला हो जाता है यह प्रकृति का नियम है धूप भी होगी तो छांव भी होगी दिन भी होगा तो रात भी होगी पर इसके साथ हमारे जीवन के भी कई सारी बातें जुड़ी हुई हैं अच्छाई और बुराई सच और झूठ यह भी इसे जुड़ा हुआ है जब अच्छा कार्य करते हैं सच बोलते हैं तो वह उजाला कहलाता है और जब हम गलत कार्य करते हैं झूठ बोलते हैं तो वह छाया की तरह छुप जाता है आज के दिन सभी लोग जगह-जगह रावण के पुतले का दहन करते हैं पर इससे पहले अपने अंदर बैठे राम को जगाना होगा जब तक राम जागेगा नहीं तो रावण के पुतले का दहन कैसे करेंगे सतयुग में भगवान ऊपर रहते थे और दानव अलग-अलग जगह में रहते थे त्रेता युग में दानव और भगवान इसी पृथ्वी पर रहते थे पर भगवान इंसान के रूप में रहते थे अयोध्या में भगवान रामचंद्र जी और लंका में रावण रहते थे दानव के रूप में
द्वापर में भगवान और दोनों एक ही घर में रहने लगे जैसे भगवान श्री कृष्ण और कंस जो उसके मामा थे एक ही परिवार के सदस्य थे
कौरव और पांडव एक ही घर में रहते थे भाई थे पर दोनों में बहुत फर्क था और कलयुग में दानव , ओर भगवान का रूप ,वह हमारे भीतर है हमारे शरीर के अंदर है जो आत्मा है वह भगवान का स्वरूप है और जो मन है वह दानव का रुप है 😏मन आपको कभी भी अच्छा कार्य करने नहीं देगा हमेशा भटकाते रहेगा और बुरी रहा की और ले जाएगा और जब आप बुद्धि की सुनोगे विवेक की सुनोगे अपनी अंतरात्मा की सुनोगे तो आपको वह भक्ति रूपी भगवान की ओर ले जाएगा तो अब फैसला आपको करना है कि आपको अपने अंदर भगवान को प्रकट करना है राम को लाना है तो मन रूपी दानव, रावण को खत्म करना होगा तभी यह पुतला दहन करने का कार्य सार्थक होगा और राम राज्य स्थापित हो जाएगा
सांई जी ने भी कई भजन गाए जीसे सुनकर भक्त जन भाव विभोर हो गए पूज्य सिंधी पंचायत चक्करभाटा के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश जैसवानी के द्वारा भी एक ज्ञानवर्धक प्रसंग सुनाया गया की रावण के बड़े-बड़े पुतले क्यों जलाए जाते हैं उन्होंने बताया कि इसका कारण है की अहंकार और पाप अत्याचार कितना ही बड़ा क्यों ना हो जाए आखिर में उसका अंत जरूर होता है जैसे रावण बड़ा महा पंडित था बलशाली था ज्ञानवान था धनवान था पर उसके अंदर अहंकार था क्रोध था पाप था और अत्याचार किया था जिसका नतीजा उसके अंत के साथ ही खत्म हुआ त्रेतायुग में जब रावण माता सीता का हरण करके पुष्पक विमान से लंका ले जा रहे थे तब जंगल में जटायु नाम का एक पक्षी बैठा था जिन्होंने देखा और उड़कर रावण से युद्ध करने लगा माता सीता को बचाने के लिए पर रावण ने अपने तलवार से जटायु के दोनों पंख काट दिए और वह 👦 बेचारे नीचे आकर जमीन में गिर गया तब उसे लेने के लिए यमदूत आए उसने कहा तुम मुझे छू भी नहीं सकते हो क्योंकि मुझे इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त है और जब तक भगवान रामचंद्र जी नहीं आएंगे मुझे यहां से कोई ले नहीं जा सकता है चाहे यमराज ही सामने आ जाए ,कुछ समय बाद भगवान रामचंद्र जी भाई लक्ष्मण के साथ माता-सिता की खोज करते-करते जंगल पहुंचे तब जटायु से मुलाकात हुई और जटायु ने सारी कथा सुनाई तब भगवान रामचंद्र जी ने जटायु को अपनी गोदी में उठाया और जटायु ने हंसते हुए अपने प्रांण त्यागे और भगवान रामचंद्र जी अपने आंखों से आंसू बाहतें रहे , क्योंकि जटायु सच्चा ईमानदार पक्षी था उसे शराफ मिला था इसलिए वह पक्षी के रूप में था पर अब उसे मुक्ति मिल गई भगवान के गोद में उन्होंने प्रांण त्यागे तो जाकर वह अपने लोक में पहुंच गया और द्वापर युग में पितामह भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था पर महाभारत के युद्ध में वह दुर्योधन का साथ दिया उसे पता था दुर्योधन गलत है वह अधर्म की राह पर है द्रोपती का चिरहरण हो रहा था तब भी चुपचाप पितामह भीष्म आखे बंद करके सिर झुकाए बैठे थे लेकिन उसे रोका नहीं जब जुआ खेला जा रहा था तब भी उसे नहीं रोका तो हर उस पाप के कार्य में वह दुर्योधन के साथी बने
और जब उसकी मौत नजदीक आई तो वह बाणों की छैयां में लेटे हुए थे क्योंकि उसने अधर्म का साथ दिया था सच जानने के बाद भी वह सत्य का साथ नहीं दिया इसलिए वह बाणों की छैयां में लेते थे और जटायु ने सच का धर्म का साथ दिया तो भगवान की गोद में लेटे थे ,मृत्यु दोनों की हुई लेकिन फर्क सामने हैं इसका तात्पर्य यह है कि अपने सामने होते हुए अधर्म को पाप को देखकर आंखें बंध न करें बल्कि उसका विरोध करें और सच का न्याय का धर्म का साथ दें इस अवसर पर हमर संगवारी के प्रधान संपादक विजय दुसेजा ने भी लोगों को जागृत करने के लिए समाज जगाने के लिए आज समाज में हो रही गलत❌ घटनाओं पर प्रकाश डाला और कैसे उन्हें दूर करें और अपने बुजुर्गों की सेवा केसे करे,अपनी धर्म संस्कृति को कैसे लोग जुड़े उसकी रक्षा कैसे करें इसके बारे में उन्होंने ज्ञानवर्धक बातें बताई कार्यक्रम के आखिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया
नगर कि दोनों पंचायत की तरफ से सांई जी का शाल ओढाकर श्रीफल से
सम्मान किया गया
सांई जी के द्वारा विधि विधान के साथ रावण के पूतले कि पूजा अर्चना की गई और रावण के पूतले का दहन किया गया , आतिशबाजी की गई सत्संग समापन के बाद प्रसाद वितरण किया गया इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में पूज्य सिंधी पंचायत चक्करभाटा पूज्य सिंधी,संत कंवर राम रियासती पंचायत चक्करभाटा के सभी सदस्यों का एवं अध्यक्ष का विशेष योग रहा
जीनमे प्रमुख है सुरेश फोटानी मनोहर मलघानी प्रकाश जैसवानी अशोक मोटवानी बल्लू आडवाणी,
भवदीय
विजय दुसेजा
