
सृजन 165। सृजन के रचनाकारों ने अपनी अपनी कहानियां, लघुकथाएं और संस्मरण प्रस्तुत किए जिस पर सदस्यों द्वारा विस्तृत चर्चा की गई। इस मासिक साहित्य चर्चा कार्यक्रम में डॉ टी महादेव राव (विशाखापटनम), सचिव सृजन ने आयोजन के विषय में चर्चा की। उन्होंने कहा कथा लेखन की शुरुआत माधवराव सप्रे की लघुकथा एक टोकरी मिट्टी से हुई। उसके बाद कहानी ने कई मोड पार किए, कई रूप हासिल किए और आज कहानी विश्वपटल पर अपनी अलग पहचान बनाए हुये है। सृजन का प्रयास है सदस्य केवल कविताओं तक सीमित न रहकर गद्य लेखन भी करें ताकि कथा, लघुकथा, संस्मरण की रचनाओं का भी सृजन हो। कार्यक्रम का आरंभ के वरिष्ठ सदस्या मीना गुप्ता (बेंगलूरु) के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने संस्था की गतिविधियों और क्रियाशीलता पर अपनी बातें रखी। उन्होंने बताया हिंदीतर क्षेत्र में हिंदी साहित्य की अलख जगाने को प्रतिबद्ध यह संस्था लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही है। कार्यक्रम का संचालन जयप्रकाश झा (दुर्गापुर) ने सफलतापूर्वक किया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई जिसे प्रस्तुत किया डॉ के अनिता ने।
मीना गुप्ता (बेंगलुरु) अपनी जीवन की महत्वपूर्ण यादों को लेकर संस्मरण, भारती शर्मा (विशाखापटनम) लघुकथा ज़िंदगी शीर्षक से। और डॉ वंदना काले (रायपुर) जिम्मेदारियों का बंटवारा लघुकथा, एल चिरंजीव राव (चेन्नई) अपनी दुर्गम यात्रा के संस्मरण,, डॉ टी महादेव राव (विशाखापटनम) जीवन में द्वंद्व में जीते मानव की लघुकथा चाहना और होना, सीमा वर्मा (विशाखापटनम) अपने गाँव और जुड़े आत्मीयों के साथ पुराने घर की संवेदनायुक्त मधुर स्मृतियाँ संस्मरण में, बी एस मूर्ति (विशाखापटनम) यात्रा के दौरान बदले सामानों के हालातों की हास्य लघुकथा, डॉ मधुबाला कुशवाहा (विशाखापटनम) ने लोगों की मानसिकता पर गहरा अनुभव मैं सुंदर हूँ संस्मरण, डॉ के अनीता (विशाखापटनम) ने कहानी तीन पीढ़ियों का बंधन,, एस वी आर नायुडु (हैदराबाद) ने पति पत्नी शीर्षक कहानी, अध्यक्ष, सृजन नीरव वर्मा (विशाखापटनम) प्यार का दर्द शीर्षक हास्य भरी आप बीती, पारसनाथ यादव (भरूच, गुजरात) संस्मरण रूपी संयोगों की लघुकथा, जयप्रकाश झा (दुर्गापुर पश्चिम बंगाल) सेवा निवृत्ति जो निवृत्ति नहीं, प्रवृत्ति है संबंधी संस्मरण प्रस्तुत किए।
इस कार्यक्रम में वीरेंद्र राय (चंडीगढ़ पंजाब), रामप्रसाद यादव (विशाखापटनम), डॉ एम विजय गोपाल (विशाखापटनम) ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। सारी रचनाओं पर चर्चा हुई और सभी ने इस कथा साहित्य चर्चा को उपयोगी, प्रेरणास्पद और स्तरीय लेखन का उदाहरण बताया और कहा इस तरह के कार्यक्रमों से लिखने की प्रेरणा और उत्साह मिलता है। कार्यक्रम का समापन डॉ मधुबाला कुशवाहा (विशाखापटनम) के द्वारा की गई कार्यक्रम की संक्षिप्त समीक्षा और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
डॉ टी महादेव राव, सचिव सृजन , विशाखापटनम