बिलासपुर :- कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वैशाली नगर, जयपुर राजस्थान से पधारी आदरणीय वरिष्ठ राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी चंद्रकला दीदी जी ने अपने उद्बोधन में जीवन सफल करने की युक्तिया बताते हुए कहा कि तन, मन, धन, संकल्प, समय, श्वास यह छः शक्तियां हमे परमात्मा द्वारा प्राप्त है. इन शक्तियों को परमात्म कार्य में लगाने से सर्व का कल्याण होगा ।

उन्होंने बताया कि जहाँ हमारा तन होगा वहाँ हमारा मन और धन होगा. जब हम तन से सेवा करते हैं तो तन सफल होता है और सेवा मे तन लगाने से संकल्प भी सेवार्थ चलते हैं इसी तरह हमारा मन और धन भी सफल होता है इसी प्रकार हमे अपनी सभी गुण, शक्ति और विशेषताओं को परमात्म कार्य में लगा कर सफल करना है क्योंकि वर्तमान समय युग परिवर्तन का है इसका 1-1 सेकंड बहुमूल्य है। हमें समझना चाहिए वर्तमान समय का एक सेकंड भी व्यर्थ गवांना माना अनेक जन्मों के लिए समय व्यर्थ गवाना के समान है. अतः सर्व संबंधों के रस व प्यार का अनुभव करने के लिए सर्व संबंध से परमात्मा को याद करना है और जितना हम परमात्मा को याद करते हैं उतनी ही अधिक शक्ति हमे प्राप्त होती है. दीदी जी ने कहा कि अपनी उन्नति के लिये कुछ नियम या संविधान हमे स्वयं बनाने हैं जिसका पालन हम दृढ़ता से करें ताकि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हमसफलता प्राप्त करें .


उनके साथ जयपुर से पधारे बीके उमा दीदी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा लक्ष्य है मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाना और जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए हमे देवताओं को देख कर दैवी गुणों को धारण करना है
कार्यक्रम में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर गवर्नमेंट द्वारा बनाये गये सभी नियमों को, ट्रैफिक रूल, प्रकृति का संरक्षण करने की और अपने जीवन में श्रेष्ट नियमों का पालन करने की प्रतिज्ञा कराई गयी

कार्यक्रम में गुप्त नवरात्र के अवसर पर बीके छाया दीदी जी (ब्रह्माकुमारीज, उसलापुर सेवा केन्द्र मुख्य संचालिका) ने आदरणीय चंद्रकला दीदी जी का तिलक, चुनरी और पुष्पगुच्छ के द्वारा सम्मान किया एवं साथ ही सभी ब्रह्मा कुमारी बहनों बीके उमा दीदी जी, (जयपुर सेवा केंद्र) बीके रमा दीदी जी, (तालापारा सेवा केंद्र) बीके कांता दीदी जी, (सिरगिट्टी, सेवा केंद्र)बीके उमा दीदी जी, बीके लता जी(हेमू नगर, सेवा केंद्र), बीके शारदा दीदी जी (मरवाही ) का भी सम्मान किया गया.
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन बीके छाया दीदी जी एवं बीके उमा दीदी जी के द्वारा किया गया. सभी आए हुए 200 भाई बहनों को ब्रह्मा भोजन भी स्वीकार कराया गया।