विजय की ✒कलम
देश :- बड़ी उम्मीद से निगाहें तुम्हारे ऊपर टिकी थी सारी आशाएं तुम्हारे ऊपर निर्भर थी पर क्या पता था की ट्रंप के टैरीफ का गुस्सा राहुल गांधी का व्यवहार का गुस्सा और ममता दीदी के काम का गुस्सा बेचारी न समझ जनता पर उतरेगा?
अर्थात 2026 का बजट आ चुका है जैसा कि गरीब से लेकर करोड़पति तक छोटे ठेला चलाने वाले दुकानदार से लेकर बड़ी फैक्ट्री वाले उद्योगपति तक सबको इंतजार रहता है बजट का कुछ ना कुछ इस बार बजट में सरकार ने उनके लिए राहत की होगी और सौगात दी होगी पर बड़े बिजनेसमैनों को तो वैसे सौगात मिलती रहती हैं अब बचे बेचारे मध्य वर्गीय और निम्न स्तर के लोग जिन्हें और कुछ नहीं बस दाल चावल रोटी सब्जी सस्ते में मिल जाए यही उनका सपना रहता है पेट भर जाए और चिंता नहीं रहती है मध्य वर्गीय लोगों की चिंता यही है कि हमारा बच्चा अच्छे स्कूल में पढे़ और अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिले और थोड़ा सा 💰धन जमा हो जाए भविष्य के लिए तो 2026 का जो बजट था जैसा कि समझ में आ रहा है इस बार उन्होंने आम जनता को कोई भी बड़ी सौगात नहीं मिली और ना ही कोई लाभ वाली योजना चालू हुई?
जिसके चक्कर में शेयर मार्केट भी धीरे-धीरे से नीचे गिरने लगा इसका तात्पर्य साफ है कि बजट आम जनता के लिए नहीं था आम जनता को फायदे वाला नहीं था बल्कि इसका फायदा सिर्फ सरकार को होगा और बड़े कॉरपोरेट जगत को होगा?
पेट्रोल डीजल में गैस सिलेंडर में कोई भी राहत आम जनता को नहीं मिली जबकि यह ऐसी जरूरत की चीज हैं अगर इसमें रेट कम होता है तो महंगाई भी कम होती है और आम जनता की जेब में जो पैसा ज्यादा निकलता है वह भी रुक जाता है 10 साल पहले जब गैस की सब्सिडी मिलती थी सबको याद रहती थी पर अब वह सब भूल गए हैं क्योंकि सब्सिडी के नाम पर सिर्फ झुंनझुना ✋हाथ में थमा दिया है अच्छा बेवकूफ बनाया जनता को चूना लगाया सब्सिडी के नाम पर? रेलवे में कोई भी छूट नहीं मिली सीनियर सिटीजन को दिव्यांग जनों को या पत्रकारों को सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही फायदा हो रहा है आम जनता को नहीं?
क्या पत्रकारों के हित के लिए कोई योजना लागू की क्या उन्हें स्वास्थ्य में रेलवे में या शिक्षा में उनके बच्चों को डायरेक्ट एडमिशन मिले स्वास्थ्य में उनका डायरेक्टर 10 लाख 20 लाख का इलाज फ्री हो रेलवे में उनका 50% छूट मिले प्रधानमंत्री योजना के तहत जो मकान बन रहे हैं उनमें उनको भी मकान मिले क्या ऐसी कोई स्कीम की घोषणा हुई नहीं हुई?
सबके हित की बात होती है पर पत्रकारों को सब भूल जाते हैं जो सब की खबर लिखता है सब की आवाज शासन तक सरकार तक पहुँचाता है पर अपना दुख तकलीफ भूल जाता है और खासकर सच्चे ईमानदार और छोटे पत्रकार ही इस चक्की में पीस जाते हैं ? बाकी का तो भला हो जाता है घूम फिर कर एक ही बात समझ में आती है 2026 का बजट हमें समझ में नहीं आता है क्योंकि हमारे काम की कोई चीज ही नहीं है तो हम समझ कर करेंगे भी क्या बस इतना कहना है कि आम बजट नहीं था खास बजट था और खास लोगों के लिए था गलती से उसका नाम आम बजट रखा गया है? जो आशाएं थी जो भरोसा था जो विश्वास था जो सपने थे सब अधूरे रह गए अब एक ही बात याद रखो जो जैसा है वैसा ही रहेगा और यही चलता रहेगा 1 साल और इंतजार करो 2027 में यूपी का चुनाव है हो सकता है उसमें बहती गंगा में आपको भी डुबकी लगाने को मिल जाए फिलहाल तो कोई राहत नहीं है भगवान का नाम लो, सुबह काम में जाओ और जो मिले उसे खा लो यही इस बजट का संदेश है जो हमने समझा है? जो जैसा समझे उसको वैसा लगे किसी को 💚हरा लगे तो किसी को 🔴लाल लगे तो किसी को निला लगे किसी को 💛पीला लगे पर हमें जैसा लगा हमने बता दिया बाकी आप समझो और इंतजार करो अगली बार का कुछ आपके लिए राहत भरी खबर आ जाए शायद मोदी जी को आपकी याद आ जाए और बीच में कुछ घोषणाएं हो जाए
तब तक के लिए शांत रहो चुप रहो सो जाओ खुश रहो मस्त रहो और काम पर जाओ, बाकी सब मोदी पर छोड़ दो
संपादकीय