विजय की ✒कलम
बिलासपुर:- समाज में एक अच्छी पहल भी हो रही है और अच्छी बात भी हो रही है पर इसमें संदेह कई सारे बातों का है जो बोलते कुछ करते कुछ है दिखाते कुछ हैं बनाते कुछ हैं कहने का तात्पर्य यह है कि अभी जो घटनाएं घट रही हैं वह बहुत ही अचंभित करने वाली भी है और सोचने वाली भी हैं पहली बात जो खुशी की है वह इस बार भी बिलासपुर में 20 मार्च को भगवान झूलेलाल जी का जन्म उत्सव चेटीचंद्र बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा और इस बार भी शोभायात्रा, भव्य रूप से एक निकलेगी अभी तक सिंधी युवक समिति जो विगत 52 सालों से शोभा यात्रा निकलती आई है वही निकालेगी पर कुछ सालों से सेंट्रल युवा विगं का गठन हुआ और उसने भी शोभायात्रा निकालनी शुरू की थी, पर इसका भी
बहुत विरोध हुआ पर पिछले साल 2025 में समाज के वरिष्ठ जनों ने और वार्ड पंचायत के अध्यक्षों के मध्यस्थता में एक शोभायात्रा निकालने का निर्णय लिया गया जो की बड़ी सराहनीय पहल थी और अच्छी पहल थी, इस कार्य में जिनका विशेष योगदान था उनमें प्रमुख है
सिंधी युवक समिति के वर्तमान अध्यक्ष मनीष लाहोरानी, संरक्षक अमर बजाज, कैलाश मंलघानी और वार्ड पंचायतों के मुखियाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी साल गुजरा,2026 आया तो कुछ लोग नहीं चाहते थे कि फिर से एक ही शोभायात्रा निकले इसलिए वह लोग पर्दे के पीछे कुछ ऐसा गणित फिट कर रहे थे कि फिर से कलह और विद्रोह पैदा हो और जिसका ठीकरा युवक समिति पर फोड़ा जाए पर उनके इस प्लान पर पानी फिर गया और इस बार भी वार्ड पंचायत के अध्यक्षों ने सिंधी युवा समिति के अध्यक्ष के लोगों ने बिल्कुल समझदारी से फैसला करते हुए समाज हित में निर्णय लिया है कि इस बार भी चेटीचंद्र उत्सव के दिन भगवान झूलेलाल जी की भव्य सुंदर शोभा यात्रा निकाली जाएगी और एक ही निकाली जाएगी सभी के सहयोग मार्गदर्शन से बहुत अच्छी बात है सभी लोग खुश थे एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दे रहे थे पर इनमें से कुछ चंद ऐसे लोग थे जीनका 😐चेहरा मुरझा गए था उदास हो गये थे , क्योंकि उनके किए किराए पर पानी फिर गया था जो उन्होंने शतरंज की बिषाद बीसाई थी चाल चली थी वह सब धरी की धरी रह गई उसकी कोई भी चाल कामयाब नहीं हुई उनका जो सोचना था जो प्लान था वह सब धरा का धरा रह गया ,
एक कहावत बहुत पुरानी है की
(रस्सी जल गई पर बल नहीं गया )
और दुसरी कहावत है
कि
(बंदर चाहे कितना ही बूढ़ा क्यों ना हो जाए गुलांटी मारना नहीं भूलता है )
🦁शेर की खाल पहना से भेड़िया खेर नहीं बन जाता है वह भेड़िया ही रहता है मीठी-मीठी चुपड़ी बातें करके कुछ लोग सोचते थे कि वह अपना उल्लू सीधा कर लेंगे और अपनी चाल में कामयाब हो जाएंगे पर ऐसा हुआ कुछ नहीं क्योंकि इनकी चाल को सिंधी युवक समिति ने भाप लिया था और समाज के वरिष्ठ जन समझ गए थे कि यह हमारे कंधे पर बंदूक रखकर गोली चलाना चाहते हैं और समाज में जो विघटन और खाई को और बढ़ाना चाहते हैं पर उनके सपने को चकनाचूर करते हुए समाज हित में बिलासपुर के हित में इन्होंने समझदारी से जो फैसला किया है निर्णय लिया है बहुत ही बधाई के और शुभकामनाएं के पात्र हैं अभी भी समाज में शकुनि जयचंद और दुर्योधन जैसे लोग बैठे हैं जो महाभारत को खत्म करना नहीं चाहते हैं बल्कि महाभारत को ओर लंबा खिचना चाहते हैं और समाज हित नहीं बल्कि अपना हीत चाहते हैं ऐसे लोगों से समाज को बचाना बहुत जरूरी है पर हमारा ध्यान अभी भी एक ही बात है कि शांतिपूर्वक शोभायात्रा निकले और अच्छा संदेश पूरे देश में जाए एकता का आपसी भाईचारे का प्रेम का बाकी जैसा कि हमने कहा है कुछ लोग अपनी तिकड़म बजीयो से बाज नही आ रहे है और कुर्सी की लालच सत्ता का मोह को त्याग करके समाज हित में आगे बढ़े सबको साथ लेकर चलें उसमें ही उनका भी भला है समाज का भी भला है आने वाली पीढ़ी का भी भला है
संपादकीय