इस फ़िल्म के बाद किसी को तो शिकार बनना ही था। धुरंधर में इन्होंने दाऊद की छीछालेदर नहीं दिखाई होती, फ़िल्म में “भारत माता की जय” न लगवाई होती, तो शायद रणवीर सिंह सेफ रहता।
इतना सब भी चलो ठीक था।
अगर रणवीर सिंह RSS मुख्यालय नहीं गए होते, डॉक्टर हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की होती, फ़िल्म सफल होने के बाद त्रिपुंड लगाकर, रुद्राक्ष पहन काशी में पूजा ना की होती, भगवा का प्रचार न किया होता, तो भी शायद सीन कुछ अलग होता। हर एक गतिविधि, एक-एक कड़ी रणवीर सिंह के खिलाफ जा चुकी थी।
सारा बॉलीवुड कुपित है कि हमारा “उर्दुवुड” वाला सिस्टम क्यों बदला जा रहा है। अमिताभ के 786 वाले बिल्ले का तेज धुंधला क्यों हो रहा है।
रणवीर सिंह को डॉन 3 के निर्माता फरहान अख्तर FWICE में घसीट लाए हैं कि आपने हमारी डॉन 3 क्यों छोड़ दी।
(FWICE यानी Federation of Western India Cine Employees — बॉलीवुड वर्कर्स और टेक्नीशियनों की बड़ी संस्था।)
कहा जा रहा है कि FWICE ने रणवीर सिंह पर बैन लगाकर इंडस्ट्री से बॉयकॉट कर दिया है।
फिल्में तो पहले भी बीच में छोड़ी जाती रहीं हैं। प्रोड्यूसर, एक्टर मिल बैठ कर समझौता कर लेते हैं। या हर्ज़ाना दे देते हैं। पर बैन आजतक कितनों पर लगा?
आपको समझना होगा कि 3 टर्म की राष्ट्रवादी सरकार होने के बावजूद बॉलीवुड कितने गहरे और सशक्त देशविरोधी हाथों में है। वो आज भी किसके इशारों पर चलता है।
सिर्फ सरकार बदली है दोस्त… सिस्टम आज भी वही है।
सोचना कभी…
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