
- सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। अरपा नदी पर निर्माणाधीन पचरीघाट बैराज तक पहुंचने वाले मार्ग की सबसे बड़ी समस्या मानी जा रही खतरनाक और खड़ी ढलान अब जल्द ही इतिहास बनने वाली है। जल संसाधन विभाग ने बैराज तक पहुंचने के लिए नई और सुरक्षित एप्रोच रोड के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। लगभग 50 मीटर लंबी इस नई सड़क के बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। ज्ञात हो कि पचरीघाट बैराज के निर्माण के दौरान बैराज तक पहुंचने के लिए बनाई गई अस्थायी एप्रोच रोड की ढलान अत्यधिक तीव्र थी। वाहन चालकों, दोपहिया सवारों तथा पैदल राहगीरों को इस मार्ग से गुजरते समय लगातार जोखिम उठाना पड़ता था। विशेषकर बारिश के मौसम में यह मार्ग दुर्घटनाओं का कारण बन सकता था। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी समय-समय पर इस समस्या को उठाया गया था।
भूमि हस्तांतरण में विलंब बना था बाधा
सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक चरण में नगर निगम की भूमि जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित नहीं हो सकी थी। भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग को सीमित क्षेत्र में अस्थायी सड़क बनाकर काम चलाना पड़ा था। यही वजह रही कि सड़क का ढाल तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं बन पाया। अब आवश्यक भूमि उपलब्ध हो जाने के बाद विभाग ने स्थायी और सुरक्षित एप्रोच रोड के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। नई सड़क बैराज से साईं बाबा मंदिर तक लगभग 50 मीटर लंबाई में विकसित की जाएगी, जिससे मार्ग की ढलान कम होगी और वाहनों का आवागमन अधिक सुरक्षित हो सकेगा।
तकनीकी मानकों के अनुरूप बनेगी सड़क
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बैराज या पुल तक पहुंचने वाली सड़क की लंबाई उसकी ऊंचाई की तुलना में पर्याप्त होनी चाहिए, ताकि ढलान सहज और सुरक्षित बनी रहे। सामान्यतः एप्रोच रोड की लंबाई संरचना की ऊंचाई से कम से कम तीन गुना रखने की अनुशंसा की जाती है। नई सड़क का डिजाइन इसी तकनीकी मानक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने के लिए संबंधित मार्ग को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। हालांकि चौपाटी और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने वाले अन्य मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और चालू रहेंगे, जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की विशेष असुविधा नहीं होगी।
अंतिम चरण में पहुंचा 120 करोड़ का अरपा बैराज
इधर लगभग 120 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रहा अरपा बैराज भी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विभाग द्वारा पचरीघाट और शिवघाट क्षेत्र में पानी रोकने का सफल ट्रायल पहले ही किया जा चुका है। ट्रायल के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं, जिससे परियोजना के निर्धारित समय पर पूर्ण होने की उम्मीद और बढ़ गई है। जल संसाधन विभाग का दावा है कि इस वर्ष मानसून के बाद बैराज में नियमित रूप से जल संग्रहण किया जाएगा। इससे सेंदरी स्थित अरपा चेकडैम तक नदी में पर्याप्त जलभराव बना रहेगा और नदी का स्वरूप पहले की अपेक्षा अधिक आकर्षक दिखाई देगा।
भूजल संवर्धन में मिलेगी बड़ी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि अरपा बैराज परियोजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा लाभ भूजल संरक्षण के रूप में सामने आएगा। वर्षभर नदी में जल उपलब्ध रहने से आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर स्थिर रहेगा तथा गिरते ग्राउंड वाटर को रिचार्ज होने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन, हरियाली और नदी तंत्र को भी दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।
शहर को मिलेंगे दोहरे लाभ
नई एप्रोच रोड के निर्माण और अरपा बैराज परियोजना के पूर्ण होने के बाद बिलासपुर शहर को यातायात सुविधा और जल संरक्षण दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। सुरक्षित मार्ग, बेहतर संपर्क, नदी में सालभर जल उपलब्धता तथा भूजल संवर्धन जैसे सकारात्मक परिणाम इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित कर सकते हैं।
