डोंगरगढ़ _ डोंगरगढ़ में प्रस्तावित परिक्रमा पथ परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। 8 किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए 11 किसानों की निजी भूमि खरीदने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि जब सरकारी भूमि और पहले से विकसित पहुंच मार्ग उपलब्ध हैं, तो निजी जमीन खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि उन्हें न तो परियोजना का पूरा नक्शा दिखाया गया और न ही जमीन अधिग्रहण की स्पष्ट जानकारी दी गई। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की जगह कुछ निजी लोग और कथित भू-कारोबारी किसानों से संपर्क कर रहे हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।
विवाद का दूसरा पहलू यह है कि परियोजना की तकनीकी स्वीकृति नियमानुसार 45 दिनों में हो जानी चाहिए थी, लेकिन लगभग एक वर्ष बाद भी स्वीकृति लंबित है। वहीं नाबार्ड योजना के तहत गजमर्रा-राजकट्टा-डोंगरगढ़ मार्ग पहले ही बन चुका है, जिससे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक सुगम पहुंच उपलब्ध है।
किसानों का सवाल है कि जब वैकल्पिक मार्ग और परिक्रमा सुविधाएं पहले से मौजूद हैं, तो करोड़ों रुपये खर्च कर समानांतर मार्ग बनाने की आवश्यकता क्या है? प्रभावित किसानों ने परियोजना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह धार्मिक पर्यटन विकास की योजना है या फिर करोड़ों के मुआवजे और जमीन के खेल का मामला? जवाब का इंतजार प्रशासन से है।
