
रीवा/ श्री झूलेलाल धाम, सिंधु भवन के महंत स्वामी धर्मदास जी का 8वाँ पुण्यतिथि दिवस सर्व संत मंडल, ब्राह्मण मंडल, श्री झूलेलाल धाम सेवा समिति, पूज्य सेंट्रल पंचायत और सर्व भक्त मंडल ने अत्यंत श्रद्धा पूर्वक मनाया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री लक्ष्मीनारायण भगवान, श्री पवनसुत हनुमान, झूलेलाल साईं और खाटू श्याम की आरती के साथ हुआ। तत्पश्चात अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट के राष्ट्रीय महामंत्री विश्वविख्यात संत स्वामी हंसदास जी ने अपनी ओजस्वी और प्रभावशाली प्रवचनों में काकभुशुण्डि और भगवान भोलेनाथ की कथा का प्रमाण देते हुए सत्संग की मर्यादाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सत्संग में अगर आपकी वजह से कथा व्यास अथवा किसी भी श्रोता का ध्यान भंग होता है तो आपके लिए ये कोई फायदे का सौदा नहीं है। अपने प्रवचनों में स्वामी जी ने गुरु अर्जुन देव जी की सनातन धर्म के प्रति उनके बलिदान का भी स्मरण किया और कहा कि किसी प्रकार के भय, प्रलोभन या तुच्छ स्वार्थ के पीछे अपने धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए।स्वामी धर्मदास की स्मृतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि स्वामी धर्मदास जी का जीवन बिल्कुल नमक की तरह था जो भोजन में दिखता नहीं पर उसका स्वाद बड़ा देता और नहीं होता तो अपनी कमी महसूस करा देता है। स्वामी धर्मदास जी ज्योतिष के बहुत बड़े विद्वान थे, उनकी वाणी अक्षरशः सत्य होती थी। उनको शास्त्रों का ज्ञान था। और संगीत विद्या में भी पारंगत थे। इतनी सारी खूबियों के होते हुए भी वे बहुत साधारण जीवन जीते थे। ऐसी सन्तात्मा का पुण्य स्मरण करते हुए सर्व भक्त मंडल ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। पल्लव प्रार्थना के पश्चात सभी ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया।कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाई साहिब कृपालदास जी, श्रीमती कोमल शर्मा, सर्वश्री सरदार प्रहलाद सिंह, घनश्याम काकवाणी, लद्दाराम ठारवानी, गोपाल पूरी, अशोक रोहिड़ा, हरचाराम हिरवानी, श्रीचंद्र कोटवानी, अशोक मंजानी “पप्पू”, कमलेश सचदेवा, महेश आसनानी, वीरेंद्र चुंगवानी, दिलीप आसनानी, नरेश तारवानी, राजकुमार टिलवानी, कैलाश कोटवानी, शंकर सहानी, जयपाल पूरी, मोतीलाल केशवानी, पमन मंशानी, प्रकाश डुडानी, मुकेश हिरवानी, रमेश वाधवानी, संतोष गंगवानी, सुंदरदास तारवाणी, कैलाश जसूजा, अमित गंगवानी, गोपाल मंजानी, सचिन डुडानी, विजय ठारवानी “बब्बू” अजीत आहूजा, महेश हिरवानी, सुरेश पंजवानी “पप्पन” पप्पू भाई, किशोर ठारवानी, मुकेश ठारवानी, विनोद पुरुस्वानी, श्याम वाधवानी, मदन चुंगवानी, हितेश रीझवानी, वरिष्ठ पत्रकार विजय थावानी, दीपक दुर्गिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक, महिलाएं, पुरुष और भक्तगण सम्मिलित हुए।
