
समय की अदालत में हर कर्म तौला जाता है,न्याय देर से सही, पर होकर ही आता है।जो आँसू तुमने किसी की पलकों पर बोए हैं,वही लौटकर जीवन में किसी मोड़ पर रोए हैं।कर्म का चक्र कभी निष्फल नहीं रहता,हर अन्याय का उत्तर समय स्वयं कहता।ब्याज सहित लौटती है हर पीड़ा की कहानी,यही है ईश्वर की अदृश्य न्याय-निशानी।इसलिए किसी का हृदय यूँ मत तोड़ो,अपने हाथों अपना ही भविष्य मत मोड़ो।क्षमा, करुणा और प्रेम ही सच्ची कमाई हैं,यही आत्मा की सबसे अमूल्य कमाई हैं।जो बाँटता है सुख, वही सुख पाता है,जो बोता है काँटे, वही चुभन उठाता है।याद रखो, जीवन कर्मों का आईना है,हर श्वास ईश्वर अल्लाह का दिया अमूल्य नगीना है।दुःख नहीं,दुआओँ का धन संसार में बाँटो,यही सच्चा न्याय,यही जीवन का पाठमाईना हैँ।*लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
