– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर । जिले के मस्तूरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले पराघाट, बेलतुकरी और भनेसरी क्षेत्र के किसानों की जमीन, रोजगार और पुनर्वास का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से गरमा गया है। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के नेतृत्व में पाराघाट स्थित वसुंधरा पावर प्लांट के खिलाफ लगभग 55 किसान परिवारों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और कलेक्टर को अलग-अलग बिंदुओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने बताया कि इन तीनों पंचायतों के लगभग 5560 किसान परिवारों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2003 से 2009 के बीच पाराघाट, बेलटुकरी और भनेसरी क्षेत्र में वसुंधरा पावर प्लांट के नाम पर किसानों से लगभग 117 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नौकरी और पुनर्वास का पक्का आश्वासन देकर खरीदी गई थी। लेकिन इतने लंबे अरसे यानी लगभग 12-13 वर्षों तक वहां किसी भी प्रकार का प्लांट स्थापित नहीं किया गया, जिससे उक्त कृषि भूमि का उपयोग भी पूरी तरह प्रभावित हुआ। इसके बाद, वर्ष 2022 में इस भूमि को किसी अन्य प्लांट या कंपनी को बेचने अथवा हस्तांतरित करने का मामला सामने आया, जिससे स्थानीय किसानों में भारी नाराजगी और गहरा असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी है कि इस बात झकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की जाए कि किसानों से जमीन किस उद्देश्य और किन शर्तों पर खरीदी गई थी, क्या इसके लिए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं, और यदि प्लांट स्थापित नहीं हुआ तो वर्ष 2022 में जमीन को दूसरी कंपनी को किस आधार पर हस्तांतरित किया गया? इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता एवं शासन की औद्योगिक व भूमि नीति के अनुसार यदि तय समय सीमा में निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप भूमि का उपयोग नहीं किया गया है, तो किसानों की जमीन उन्हें वापस दिलाई जाए तथा उचित क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाए।
इस दौरान ज्ञापन में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में संबंधित पटवारी द्वारा छलकपट करते हुए खसरा नंबर 170 की लगभग 2.94 एकड़ शासकीय भूमि, जो कि मूल रूप से घासभूमि, सामुदायिक उपयोग और मनरेगा के तहत मिट्टी मुरुम व सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों से जुड़ी भूमि है,उसे अवैध रूप से प्लांट के नाम पर दर्ज कर दिया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि खसरा नंबर 170 के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों, जैसे कि बंटान, नामांतरण आदि की गहन जांच की जाए और यदि इसमें कोई भी नियमविरुद्ध कृत्य सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर इस शासकीय भूमि को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए। महेंद्र गंगोत्री ने इस अवसर पर कहा कि किसानों की जमीन केवल जमीन का एक छोटा टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका और भविष्य का एकमात्र आधार है। यदि जिस उद्देश्य के लिए जमीन ली गई थी, वह पूरा नहीं होता है और जमीन को दूसरी कंपनी को ट्रांसफर कर दिया जाता है, तो यह सीधे तौर पर जनहित का विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित किसानों को उनकी भूमि वापस दिलाने, उचित क्षतिपूर्ति, रोजगार और पुनर्वास का लाभ दिलाने के लिए तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, किसानों ने पुलिस और प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि जब प्रभावित किसान अपनी समस्याओं को लेकर प्लांट प्रबंधन से बातचीत करने पहुंचे, तो कुछ किसान परिवारों को पुलिस और प्रशासन के माध्यम से डराने-धमकाने और उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। किसानों ने इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले किसानों के अधिकारों की पूरी सुरक्षा हो सके।
## –
किसानों की जमीन का न्यायपूर्ण समाधान हो, शासकीय भूमि सुरक्षित रहे और प्रभावित परिवारों को उनका हक-जमीन, रोजगार, पुनर्वास एवं उचित क्षतिपूर्ति-मिले।
– जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण), बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
