बिलासपुर। गोड़पारा स्थित सांई बाबा मंदिर के सामने धर्म प्रचारक रामायण, रामलीला एवं राम कथा महोत्सव का शुभारंभ विधिवत रूप से किया गया। काशी क्षेत्र, विंध्याचल धाम, मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) की रामलीला मंडली द्वारा आयोजित यह धार्मिक आयोजन 9 सितंबर से 20 सितंबर तक चलेगा।
कार्यक्रम का आयोजन विजय कुमार तिवारी के द्वारा किया जा रहा है। आयोजन की शुरुआत पंडित जी द्वारा नारियल फोड़कर एवं भगवान विष्णु की आरती उतारकर की गई। इसके पश्चात भजन-कीर्तन के साथ राम कथा का शुभारंभ हुआ। मधुर भजनों और मनमोहक धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
आयोजकों ने बताया कि उत्तर प्रदेश की यह मंडली पिछले करीब 40 वर्षों से राम नाम, धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में निरंतर कार्य कर रही है। मंडली में लगभग 20 कलाकार शामिल हैं। पिछले करीब 10 वर्षों से यह मंडली बिलासपुर आकर शहर के अलग-अलग स्थानों पर राम कथा, रामायण एवं रामलीला का आयोजन करती आ रही है।
राम कथा का आयोजन प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक किया जा रहा है। कथा के साथ भजन-कीर्तन और रामलीला की प्रस्तुतियां भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। आयोजन के दूसरे दिन भगवान श्रीरामचंद्र जी के जन्मोत्सव की कथा विशेष रूप से प्रस्तुत की जाएगी।
संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का प्रयास
आज के इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में भी राम कथा, रामलीला और भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन हमारी संस्कृति, कला और परंपराओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। ऐसे कलाकार और आयोजनकर्ता निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने वर्षों से अपनी कला और परंपरा को संजोकर रखा है तथा राम नाम को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
बिलासपुर अपनी आधुनिकता के साथ-साथ संस्कार, भाईचारे और प्रेम के लिए भी जाना जाता है। ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और धर्म से जोड़ने के साथ-साथ ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक शिक्षा भी प्रदान करते हैं।
आयोजकों ने शहरवासियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में राम कथा में शामिल होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करें और आयोजन समिति को प्रोत्साहित करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक हमारी धार्मिक परंपराएं और लोक कलाएं इसी तरह जीवित रह सकें।
“दिन में रोटी, रात में रोटी, दिन भर रोटी-रोटी;
प्रभु भजन अगर ना किया बंदे, तो किस्मत हो गई खोटी।”
भवदीय
विजय दुसेजा
