वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, बुखार और मलेरिया के मरीज बढ़े, पंजीयन व उपचार के लिए लंबा इंतजार
– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। बारिश की विदाई के साथ मौसम में तेजी से बदलाव शुरू हो गया है। उमस के बीच तेज धूप और बदलते तापमान का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के विभिन्न मोहल्लों और वार्डों में इन दिनों वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, बुखार तथा मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिसके चलते सिम्स बिलासपुर में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।
सुबह से लग रही मरीजों की कतार
मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच सिम्स पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को पंजीयन से लेकर चिकित्सकीय परामर्श तक कई चरणों में इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल परिसर में भीड़ का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रहा है।
बढ़ते दबाव के बीच अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत
मरीजों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन के सामने अब अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने की जरूरत महसूस की जा रही है। पंजीयन और संबंधित काउंटरों पर भीड़ कम करने के लिए आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त काउंटर शुरू किए जा सकते हैं। साथ ही मरीजों की कतार को व्यवस्थित करने, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तथा गंभीर और सामान्य मरीजों के लिए अलग-अलग व्यवस्था किए जाने से भी लोगों को राहत मिल सकती है।
मौसम परिवर्तन में सावधानी जरूरी
चिकित्सकीय दृष्टि से मौसम परिवर्तन के दौरान वायरल संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ पानी का सेवन, आसपास सफाई रखने तथा मच्छरों से बचाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।
मौसम में बदलाव के साथ अस्पतालों में बढ़ते मरीजों का दबाव केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है। समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और अस्पतालों में अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने से मरीजों और उनके परिजनों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।
