– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। पति की अस्थियां लेकर तीन बच्चों के साथ घर लौट रही एक मां की यात्रा उस समय बेहद पीड़ादायक हो गई, जब पानी भरने के लिए ट्रेन से उतरते ही ट्रेन रवाना हो गई और उसके तीनों बच्चे उसी ट्रेन में छूट गए। बच्चों से बिछड़ने के बाद घबराई मां के लिए रेलवे की तत्परता राहत बनकर सामने आई। बैतूल में बच्चों को सुरक्षित उतारकर चाइल्ड हेल्पलाइन की निगरानी में रखा गया, वहीं बिलासपुर पहुंची मां को रेलवे की विशेष टीम ने बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी दी और उन्हें बच्चों तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
पानी भरने उतरी तो चल पड़ी ट्रेन, बैतूल में सुरक्षित मिले तीनों बच्चे; बिलासपुर रेलवे टीम ने मां को पहुंचाया बच्चों तक
मामला बिलाईगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम बेलटुकरी निवासी लक्ष्मी साहू (40) का है। लक्ष्मी अपने पति संतोष साहू के साथ रोजगार के सिलसिले में ठेकेदार के माध्यम से श्रीनगर गई थीं। बताया गया कि करीब 19 सितंबर को संतोष साहू की मृत्यु हो गई। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लक्ष्मी पति की अस्थियां लेकर अपने तीन बच्चों के साथ गांव लौट रही थीं। यात्रा के दौरान एक स्टेशन पर लक्ष्मी पानी भरने के लिए ट्रेन से नीचे उतरीं। इसी दौरान ट्रेन चल पड़ी। वह ट्रेन में वापस नहीं चढ़ सकीं, जबकि उनके तीनों बच्चे ट्रेन में ही रह गए। अचानक बच्चों से बिछड़ जाने से लक्ष्मी बेहद परेशान हो गईं। ट्रेन आगे बढ़ते हुए बैतूल पहुंची, जहां रेलवे की मदद से तीनों बच्चों को सुरक्षित उतार लिया गया और उन्हें चाइल्ड हेल्पलाइन की निगरानी में रखा गया। इधर, लक्ष्मी दूसरी ट्रेन से बिलासपुर पहुंचीं और बच्चों को लेकर चिंतित रहीं। मामले की जानकारी मिलते ही बिलासपुर रेल मंडल के वाणिज्य विभाग की विशेष टीम सक्रिय हुई। टीम ने बैतूल स्थित चाइल्ड केयर से संपर्क कर बच्चों के सुरक्षित होने की पुष्टि की और इसकी जानकारी लक्ष्मी को दी। बच्चों के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही मां की चिंता कुछ कम हुई। इसके बाद रेलवे टीम ने लक्ष्मी के आगे के सफर के लिए टिकट की व्यवस्था की और उन्हें सुरक्षित उसलापुर रेलवे स्टेशन पहुंचाया। वहां से उन्हें अमरकंटक एक्सप्रेस में बैठाकर इटारसी के लिए रवाना किया गया, ताकि वे वहां से बैतूल पहुंचकर अपने तीनों बच्चों को साथ ले सकें।पति की अस्थियां संभाले बच्चों से बिछड़ी मां के लिए यह सफर भावनाओं और चिंता से भरा रहा। ऐसे कठिन समय में रेलवे कर्मचारियों की तत्परता ने न केवल बच्चों को सुरक्षित रखा, बल्कि मां को उनके बच्चों तक पहुंचने का रास्ता भी आसान किया।
