कोटवारी भूमि पर 13 कमरों का सर्किट हाउस, 239 रहवासियों का विरोध; SDM बोलीं—शासन भूमि का उपयोग कर सकता है, रहवासियों ने पूछा—तो रिकॉर्ड में आवंटन/प्रयोजन की प्रविष्टि कहां?
खबर, अनिल शुक्ला प्रधान संपादक
बिलासपुर। बिलासपुर-रायपुर मुख्य मार्ग स्थित बोदरी तहसील अंतर्गत रामावैली कॉलोनी में करीब 450 परिवारों के सामने अब जमीन और निर्माण से जुड़ा विवाद गंभीर रूप लेता जा रहा है। RERA एवं T&CP से स्वीकृत बताई जा रही इस कॉलोनी में महंगे मकान खरीदकर रहने वाले लोगों का आरोप है कि कॉलोनी निर्माण के समय उन्हें आसपास की शासकीय/कोटवारी भूमि की स्थिति की पूरी जानकारी नहीं दी गई। अब कॉलोनी से लगी करीब 2.50 एकड़ कोटवारी भूमि, खसरा नंबर 10, पर प्रस्तावित 13 कमरों के सर्किट हाउस ने पूरे मामले को नए विवाद में बदल दिया है।
कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर यहां मकान खरीदे हैं। कई मकानों की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में कॉलोनी के बीच में नए निर्माण और भूमि उपयोग को लेकर पैदा हुई स्थिति ने रहवासियों की सुरक्षा, निजता और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
SDM आकांक्षा त्रिपाठी का अलग तर्क
मामले में बिल्हा SDM आकांक्षा त्रिपाठी से चर्चा किए जाने पर उन्होंने कथित रूप से कहा कि कोटवारी व्यवस्था ग्राम पंचायत क्षेत्र में होती है, नगरीय निकाय में कोटवारी व्यवस्था नहीं होती। कोटवार की सेवा भूमि शासन की होती है और उसे उपयोग के लिए अलग से कोई भूमि नहीं दी जाती।
SDM के अनुसार, संबंधित कोटवार ढेलाऊ दास कृषि कार्य नहीं करता था, हालांकि वह कोटवारी ड्यूटी करता है। उनका यह भी कहना है कि तहसील एवं अनुविभागीय कार्यालय के स्तर पर यदि शासन उचित समझे तो उक्त जमीन पर शासकीय निर्माण कराया जा सकता है।
लेकिन अब यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—यदि खसरा नंबर 10 की जमीन शासकीय है और उसका उपयोग किसी नए शासकीय प्रयोजन के लिए किया जा रहा है, तो उस उपयोग का राजस्व रिकॉर्ड में आधार क्या है?
रिकॉर्ड में नई प्रविष्टि कहां है?
कॉलोनीवासियों का कहना है कि शासकीय भूमि को किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए उपयोग में लेने की स्थिति में संबंधित आदेश, आवंटन अथवा प्रयोजन के अनुरूप राजस्व अभिलेखों में आवश्यक कार्रवाई और प्रविष्टियों का होना महत्वपूर्ण है।
रहवासियों का दावा है कि खसरा नंबर 10 की B-1/कैफियत में ऐसा कोई स्पष्ट संशोधन या नई प्रविष्टि दिखाई नहीं दे रही है, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उक्त भूमि को सर्किट हाउस निर्माण के लिए कब, किस आदेश से और किस प्रयोजन के लिए निर्धारित किया गया।
छत्तीसगढ़ के आधिकारिक भुइयां पोर्टल पर खसरा विवरण, B-I/P-II तथा शासकीय खसरों की जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध है।
यही वजह है कि अब कॉलोनीवासी सवाल उठा रहे हैं कि सिर्फ यह कह देना कि जमीन शासन की है, पर्याप्त है या फिर किसी विशिष्ट निर्माण के लिए भूमि के उपयोग का विधिवत प्रशासनिक एवं राजस्व रिकॉर्ड भी होना चाहिए?
19,200 वर्गफीट के कथित आवंटन ने भी खड़े किए सवाल
इसी खसरा नंबर से जुड़ा एक और मामला रहवासियों के बीच चर्चा का विषय है। उनका दावा है कि उक्त करीब 2.50 एकड़ भूमि में से लगभग 19,200 वर्गफीट भूमि पूर्व में प्रकाश ग्वालानी को शासन द्वारा आवंटित की गई है, जिसका उल्लेख राजस्व रिकॉर्ड की कैफियत में होने की बात कही जा रही है।
कॉलोनीवासियों का सवाल है कि यदि भूमि मूलतः कोटवारी/शासकीय मद से संबंधित थी, तो उसमें निजी आवंटन किस प्रक्रिया के तहत हुआ? और यदि किसी हिस्से का प्रयोजन बदला गया, तो उसके पीछे कौन सा आदेश और कौन सी राजस्व प्रक्रिया अपनाई गई?
एक ही जमीन पर बैंक लोन और अब सरकारी निर्माण का दावा
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कोटवार ढेलाऊ दास द्वारा इसी भूमि को आधार बनाकर बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इस दावे की पुष्टि बैंक रिकॉर्ड से होना आवश्यक है।
यदि यह तथ्य दस्तावेजों से सही साबित होता है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि जिस भूमि की वर्तमान प्रकृति और अधिकार को लेकर राजस्व स्तर पर सवाल मौजूद हैं, उस भूमि को बैंकिंग दस्तावेजों में किस आधार पर प्रस्तुत किया गया।
SDO कार्यालय में मामला लंबित, फिर निर्माण कैसे?
कॉलोनीवासियों के अनुसार इसी भूमि से संबंधित मामला संबंधित अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष लंबित है और उसका अंतिम निराकरण अभी नहीं हुआ है। दूसरी ओर इसी क्षेत्र में PWD द्वारा 13 कमरों के सर्किट हाउस का निर्माण कराया जा रहा है।
यहीं से रहवासियों का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—
जब भूमि से संबंधित राजस्व विवाद/प्रकरण का अंतिम निराकरण ही नहीं हुआ, तो क्या उस भूमि पर निर्माण शुरू करने से पहले पूरे विवाद का निपटारा जरूरी नहीं था?
यह सवाल अब प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रक्रिया दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।
239 रहवासियों का समर्थन, भूख हड़ताल की चेतावनी
सर्किट हाउस निर्माण के विरोध में रामावैली के 239 रहवासियों के समर्थन वाला ज्ञापन पुलिस अधीक्षक तथा बिल्हा अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा गया है।
ज्ञापन में रहवासियों ने निर्माण कार्य तत्काल रोकने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निर्माण कार्य जल्द नहीं रोका गया तो कॉलोनीवासी भूख हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे।
रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी के बीचों-बीच सर्किट हाउस बनने से बाहरी लोगों एवं वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे कॉलोनी की सुरक्षा और निजता प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है।
RERA की शर्तें भी जांच के घेरे में
कॉलोनीवासियों ने कॉलोनी निर्माण के दौरान RERA और T&CP में प्रस्तुत जानकारी तथा मौके की वास्तविक स्थिति के बीच कथित अंतर को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उल्लेख स्वीकृत लेआउट एवं संबंधित दस्तावेजों में किया गया था, उनका पालन हुआ या नहीं, इसकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
उनका आरोप है कि इस संबंध में पूर्व में कई शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अब प्रशासन के सामने ये बड़े सवाल
1. खसरा नंबर 10 की पूरी 2.50 एकड़ भूमि का वर्तमान राजस्व दर्जा क्या है?
2. यदि यह कोटवारी/शासकीय भूमि है तो 19,200 वर्गफीट भूमि का कथित आवंटन किस आदेश और किस प्रक्रिया के तहत हुआ?
3. यदि सर्किट हाउस के लिए भूमि का उपयोग निर्धारित किया गया है तो उसका विधिवत आदेश और राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित प्रविष्टि कहां है?
4. जब संबंधित भूमि को लेकर राजस्व प्रकरण लंबित है तो निर्माण कार्य शुरू करने का आधार क्या है?
5. ढेलाऊ दास द्वारा उक्त भूमि के आधार पर बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लिए जाने की बात सही है तो बैंक रिकॉर्ड में भूमि की स्थिति क्या दर्ज थी?
6. RERA/T&CP स्वीकृति के समय कॉलोनी से लगी शासकीय एवं कोटवारी भूमि की जानकारी किस रूप में दर्ज थी?
7. कॉलोनीवासियों द्वारा पूर्व में की गई शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
450 परिवारों की निगाह अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
रामावैली के रहवासियों का कहना है कि वे किसी विकास कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके घरों की सुरक्षा, निजता और भविष्य की कीमत पर कोई निर्माण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि संबंधित भूमि शासकीय है और शासन उसके उपयोग का निर्णय ले सकता है। ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भूमि का वास्तविक राजस्व दर्जा, संबंधित आदेश, आवंटन प्रक्रिया, लंबित प्रकरण और सर्किट हाउस निर्माण की स्वीकृति सार्वजनिक दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट की जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ 2.50 एकड़ जमीन का नहीं है—सवाल उन 450 परिवारों के भरोसे का भी है, जिन्होंने करोड़ों रुपये खर्च कर यह मानकर अपना घर बनाया कि उनकी कॉलोनी का भविष्य सुरक्षित और सुनियोजित है।
