जय श्री कृष्ण।
संत साईं कृष्ण दास का 26वां अवतरण दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया,,,,
“प्रभु, तुमने की सबकी तरक्की की है, अब मेरी भी कर दो… मैं चरणों का दास तुम्हारा, मेरी नौकरी पक्की कर दो” — संत साईं कृष्ण दास।
बिलासपुर। बाबा अनंद राम दरबार, चकरभाठा में संत साईं कृष्ण दास जी का 26वां अवतरण दिवस साध-संगत द्वारा सादगी, श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रात्रि 8 बजे बाबा अनंद राम एवं बाबा भगत राम साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना के साथ हुई।
इस अवसर पर एकादशी वाले बलराम भैया जी तथा कृष्ण धाम कालीबाड़ी, रायपुर से आए सुदामा भैया जी ने सुंदर भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों ने उपस्थित साध-संगत को भाव-विभोर कर दिया और पूरा दरबार भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
कार्यक्रम में संत साईं कृष्ण दास ने अपनी अमृतवाणी से साध-संगत को संबोधित करते हुए अवतरण दिवस पर उपस्थित होकर आशीर्वाद देने के लिए सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन धन-दौलत की कमाई के बजाय भक्ति, सिमरन और प्रभु के नाम की कमाई में समर्पित हो, क्योंकि यही हमारा असली धन और खजाना है, तथा उन्हें बार-बार बाबा आनंद राम दरबार की सेवा करने का अवसर प्राप्त हो।
भगवान के चरणों में समर्पण ही सच्ची भक्ति है।
संत साईं कृष्ण दास ने महाभारत से जुड़ा भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन और दुर्योधन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्चा भक्त वह है जो भगवान से सांसारिक संपत्ति नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का साथ मांगता है।
उन्होंने प्रसंग के माध्यम से बताया कि जब अर्जुन और दुर्योधन भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगने पहुंचे, तो अर्जुन ने भगवान की सेना के बजाय स्वयं श्रीकृष्ण को चुना। अर्जुन ने स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करते हुए उनका साथ मांगा। वहीं दुर्योधन ने श्रीकृष्ण की विशाल सेना को चुना।
संत साईं कृष्ण दास ने कहा कि इस प्रसंग की सीख है कि भक्त को केवल भगवान को पाने की इच्छा नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुख, पीड़ा और परिस्थितियां प्रभु को समर्पित कर उनसे हमेशा अपने चरणों का दास बनाए रखने की प्रार्थना करनी चाहिए।
उन्होंने अपनी भक्ति भावना को इन पंक्तियों में व्यक्त किया—
“है प्रभु, तुमने की सबकी तरक्की की है, अब मेरी भी कर दो।
मैं चरणों का दास तुम्हारा, मेरी नौकरी पक्की कर दो।”
यह भावपूर्ण प्रसंग सुनकर साध-संगत भाव-विभोर हो गई और पूरे दरबार में भक्ति एवं श्रद्धा का वातावरण बन गया।
भजनों पर झूम उठी साध-संगत
कार्यक्रम के अंतिम चरण में संत साईं कृष्ण दास जी ने स्वयं भी भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर उपस्थित भक्तजन झूम उठे। परिवार एवं साध-संगत की उपस्थिति में केक काटा गया तथा भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं आम भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसके जरिए हजारों श्रद्धालुओं ने घर बैठे सत्संग एवं भक्ति कार्यक्रम का आनंद लिया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साध-संगत इस अवसर पर चकरभाठा पहुंची।
आयोजन को सफल बनाने में बाबा अनंद राम सेवा समिति चकरभाठा सहित बिलासपुर, कोरबा, रायपुर एवं भिलाई की साध-संगत और सेवादारों का विशेष सहयोग रहा।
अवतरण दिवस के अवसर पर बाबा अनंद राम दरबार एवं साध-संगत की ओर से संत साईं कृष्ण दास जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं तथा उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन एवं निरंतर सेवा-साधना की कामना की गई। सोशल मीडिया के माध्यम से हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा ने भी सांई जी को जन्मदिन की अवतरण दिवस की बहुत-बहुत बधाइयां और शुभकामनाएं दी
