कोषालय में पर्याप्त स्टॉक, फिर भी वेंडरों की मनमानी; 15 रुपए की सामग्री के लिए मांगे जा रहे 30 रुपए
– विशेष रिपोर्टर
बिलासपुर। जिले में कोर्ट फीस टिकट और छोटे मूल्य के स्टांप की उपलब्धता को लेकर आम लोगों की परेशानी दूर होने के बावजूद स्टांप वेंडरों की कथित मनमानी नई समस्या बनकर सामने आ रही है। जिला कोषालय में कोर्ट फीस और नकल टिकट का पर्याप्त स्टॉक पहुंच चुका है, लेकिन दूसरी ओर कुछ स्टांप वेंडरों द्वारा निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने के आरोप सामने आए हैं। पड़ताल के दौरान 10 रुपए के स्टांप पेपर के लिए 20 रुपए और 5 रुपए के कोर्ट फीस टिकट के लिए 10 रुपए तक मांगे जाने की स्थिति सामने आई। यानी 5 रुपए की कोर्ट फीस और 10 रुपए के स्टांप की कुल निर्धारित कीमत 15 रुपए होती है, लेकिन ग्राहक से इसके लिए 30 रुपए तक मांगे जा रहे हैं। इससे स्टांप बिक्री की व्यवस्था और वेंडरों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लाइसेंस और रेट की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी
नियमों के तहत स्टांप की बिक्री के लिए वैध लाइसेंस जरूरी है। केवल अधिकृत और पंजीकृत व्यक्ति या संस्था ही स्टांप बेच सकती है। वेंडर को स्वीकृत स्थान से ही बिक्री करने तथा लाइसेंस का निर्धारित अवधि में नवीनीकरण कराने की व्यवस्था है। इसके साथ ही ग्राहकों की सुविधा के लिए लाइसेंस की प्रति, कार्य अवधि और उपलब्ध स्टांप की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना अपेक्षित है। लेकिन शहर के कई स्थानों पर स्टांप वेंडरों के यहां न तो स्टॉक की स्पष्ट जानकारी दिखाई देती है और न ही निर्धारित दरों की सूची प्रमुखता से प्रदर्शित की जा रही है। ऐसे में आम ग्राहक को वास्तविक कीमत पता नहीं चलती और अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायतों को बल मिलता है।
हमर संगवारी के पड़ताल में सामने आई मनमानी
पड़ताल के दौरान एक स्टांप वेंडर से 5 रुपए की कोर्ट फीस और 10 रुपए का स्टांप पेपर मांगा गया। वेंडर ने 5 रुपए की कोर्ट फीस उपलब्ध होने की बात कही, लेकिन 10 रुपए के स्टांप पेपर के लिए 20 रुपए की मांग की। निर्धारित मूल्य से अधिक राशि लिए जाने पर सवाल किया गया तो वेंडर ने 20 रुपए ही कीमत होने की बात कही। इसी तरह दूसरे वेंडर के यहां 5 रुपए की कोर्ट फीस और 10 रुपए का स्टांप पेपर मांगने पर कुल 30 रुपए बताए गए। ग्राहक द्वारा निर्धारित कीमत के अनुसार कुल राशि 15 रुपए होने की बात कहने के बावजूद वेंडर अपनी मांग पर कायम रहा।यदि यह स्थिति नियमित रूप से बनी हुई है तो छोटे मूल्य के स्टांप और कोर्ट फीस लेने वाले आम नागरिकों पर इसका सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
रजिस्ट्री से लेकर आरटीआई तक हर जगह जरूरत
बिलासपुर में जमीन और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों के कारण स्टांप की मांग काफी अधिक रहती है। जिला पंजीयक कार्यालय में प्रतिदिन करोड़ों रुपए की संपत्तियों की रजिस्ट्री होती है। इसके अलावा आरटीआई आवेदन, किरायानामा, पार्टनरशिप डीड, नाम परिवर्तन और विभिन्न कानूनी व प्रशासनिक दस्तावेजों में भी स्टांप और कोर्ट फीस टिकट की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्टांप की कीमत से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायत को महज छोटी रकम का मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बड़ी संख्या में लोग रोजाना इन सेवाओं का उपयोग करते हैं और अतिरिक्त वसूली का कुल आर्थिक भार काफी बढ़ सकता है।
जिले में करीब 180 वेंडर, सरकार से मिलता है कमीशन
जिला कोषालय के अनुसार बिलासपुर जिले में करीब 180 स्टांप वेंडर हैं। स्टांप बिक्री पर वेंडरों को सरकार की ओर से निर्धारित कमीशन भी मिलता है। ऐसे में निर्धारित कीमत से अतिरिक्त राशि वसूलने की शिकायतों की नियमित जांच और निगरानी की जरूरत और बढ़ जाती है। सवाल यह भी है कि जब वेंडरों को सरकार की ओर से कमीशन दिया जाता है तो फिर ग्राहकों से स्टांप के निर्धारित मूल्य से अतिरिक्त राशि किस आधार पर ली जा रही है? यदि किसी अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान है तो उसकी स्पष्ट जानकारी ग्राहक को रसीद और दर सूची के माध्यम से क्यों नहीं दी जाती?
शॉर्टेज खत्म, कोषालय में पर्याप्त स्टॉक
कोर्ट फीस और नकल टिकट की उपलब्धता को लेकर जिला कोषालय ने स्थिति स्पष्ट की है। जिला कोषालय अधिकारी बसंत गुलेरी के अनुसार इनकी कमी केवल बिलासपुर में नहीं, बल्कि पूरे राज्य में थी। इसकी आपूर्ति नासिक से होती है और राज्य का नोडल ट्रेजरी रायपुर है।उन्होंने बताया कि 29 सितंबर को स्टॉक रायपुर पहुंचने के बाद 30 सितंबर को बिलासपुर के लिए स्टॉक मंगवा लिया गया था। अब पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कमी की समस्या नहीं होनी चाहिए। ऐसे में अब कोर्ट फीस टिकट या नकल टिकट की उपलब्धता के नाम पर ग्राहकों से अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतों की भी जांच जरूरी हो गई है।
अधिकारी बोले- शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई
जिला पंजीयक राजीव स्वर्णकार ने बताया कि स्टांप वेंडरों की मॉनिटरिंग विभाग की जिम्मेदारी है और समय-समय पर जांच भी की जाती है। यदि वेंडरों द्वारा स्टॉक और रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं किए जाने की जानकारी सामने आती है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्धारित मूल्य से अधिक राशि में स्टांप बेचने की जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब निगरानी व्यवस्था की परीक्षा
कोषालय में पर्याप्त स्टॉक पहुंचने के बाद स्टांप और कोर्ट फीस टिकट की उपलब्धता का संकट काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। लेकिन इसके साथ ही निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों ने प्रशासन के सामने दूसरा सवाल खड़ा कर दिया है। आम ग्राहक के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्टांप पर कीमत पहले से निर्धारित है और वेंडर को सरकार की ओर से कमीशन भी मिलता है, तो फिर 10 रुपए का स्टांप 20 रुपए में और 5 रुपए की कोर्ट फीस 10 रुपए में क्यों? अब देखना होगा कि संबंधित विभाग केवल जांच का आश्वासन देता है या वास्तव मेंबर वेंडरों की नियमित निगरानी, दर सूची के अनिवार्य प्रदर्शन और अधिक वसूली पर प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था भी लागू करता है।
