आमाडोब में वन्यप्राणी सप्ताह पर जागरूकता कार्यक्रम, छह गांवों के ग्रामीण और स्कूली बच्चे हुए शामिल
– विशेष संवाददाता- सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व के केंवची बफर क्षेत्र में बाघों की नियमित आवाजाही वाले कॉरिडोर की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग ने ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। वन्यप्राणी सप्ताह के तहत सोमवार को ग्राम आमाडोब में आयोजित कार्यक्रम में आसपास के छह गांवों के ग्रामीणों, स्व-सहायता समूहों और स्कूली विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में वन्यजीवों के सुरक्षित आवास, बाघ कॉरिडोर, मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व और जंगल संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। वन्यप्राणी सप्ताह की इस वर्ष की थीम ‘Habitats. Thriving Wildlife’ यानी ‘जुड़े आवास, समृद्ध वन्यजीवन’ रखी गई है। कार्यक्रम में इसी थीम के माध्यम से समझाया गया कि वन्यजीवों के आवास सुरक्षित और आपस में जुड़े रहेंगे, तभी बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों का सुरक्षित विचरण और संरक्षण संभव होगा।
केंवची बफर में बाघों की नियमित आवाजाही
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंवची बफर क्षेत्र बाघों के आवागमन वाले महत्वपूर्ण कॉरिडोर में शामिल है। क्षेत्र में वन्यप्राणियों की मौजूदगी नियमित रूप से दर्ज होती रहती है। ऐसे में जंगल और उससे लगे क्षेत्रों में वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्र संचालक प्रियंका पाण्डेय ने ग्रामीणों को बाघ कॉरिडोर और उसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित और जुड़े हुए आवास बनाए रखना संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी है।
‘झुमरी’ की कहानी ने बताया संरक्षण का महत्व
कार्यक्रम में बांधवगढ़ से अचानकमार टाइगर रिजर्व लाई गई बाघिन ‘झुमरी’ की कहानी पर आधारित फिल्म ग्रामीणों और विद्यार्थियों को दिखाई गई। फिल्म के जरिए बाघों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास तथा सुरक्षित आवागमन से जुड़े विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया। वन विभाग ने ग्रामीणों को बताया कि बाघ और अन्य वन्यजीव केवल जंगल की संपदा नहीं हैं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। इनके संरक्षण में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
हाथी विशेषज्ञ ने बताए सुरक्षा के उपाय
कार्यक्रम में हाथी विशेषज्ञ मंसूर खान ने मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। वहीं WWF के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर उपेन्द्र दुबे ने वन्यप्राणियों की मॉनिटरिंग और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की। उप संचालक दिनेश कुमार पटेल ने ग्रामीणों को वन एवं वन्यप्राणियों के महत्व तथा जंगलों की सुरक्षा में समुदाय की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। वन्यप्राणी विशेषज्ञ अनुराग शुक्ला ने भी संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
छह गांवों के ग्रामीण और विद्यार्थी हुए शामिल
आमाडोब में आयोजित कार्यक्रम में आमाडोब, पटपरी, केंवची, बानघाट, रंजकी और छोटकीरवार गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। केंवची स्व-सहायता समूह के सदस्यों के साथ आमाडोब स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।वन्यप्राणी सप्ताह की थीम पर विद्यार्थियों के लिए निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य वन संरक्षक प्रियंका पाण्डेय ने सम्मानित किया।
संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर
वन विभाग ने ग्रामीणों से वन्यप्राणियों की मौजूदगी अथवा किसी असामान्य गतिविधि की सूचना समय पर वन अमले तक पहुंचाने, जंगलों की सुरक्षा में सहयोग करने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में सावधानी बरतने की अपील की।कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक प्रियंका पाण्डेय, उप संचालक दिनेश कुमार पटेल, हाथी विशेषज्ञ मंसूर खान, WWF के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर उपेन्द्र दुबे, वन्यप्राणी विशेषज्ञ अनुराग शुक्ला, ग्राम पंचायत आमाडोब की सरपंच सुरंजना आयाम सहित कोर एवं बफर क्षेत्र का वन अमला मौजूद रहा। वन विभाग अचानकमार टाइगर रिजर्व में 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यप्राणी सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को लेकर विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
