किसी के लाइसेंस पर कारोबार, प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर निगरानी कमजोर?
खबर अनिल शुक्ला की बिलासपुर से:-
बिलासपुर। दीपावली से पहले पटाखा कारोबार बढ़ने के साथ ही लाइसेंस व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि कुछ व्यापारी स्वयं के नाम से लाइसेंस नहीं होने के बावजूद दूसरे लाइसेंसधारकों के नाम या लाइसेंस के आधार पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को यह जांचना जरूरी है कि लाइसेंस किस व्यक्ति, फर्म और परिसर के नाम पर है और मौके पर वास्तविक कारोबारी कौन है।
दूसरी ओर प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर भी सवाल उठ रहे हैं। बाजार में प्रतिबंधित अथवा नियमों के विपरीत पटाखों की बिक्री रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और स्टॉक जांच की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह स्पष्ट नहीं है।
पुलिस सत्यापन सिर्फ अपराध रिकॉर्ड तक सीमित?
अस्थायी लाइसेंस के लिए पुलिस सत्यापन किया जा रहा है। लेकिन क्या सत्यापन में केवल आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड देखा जा रहा है या दुकान, भंडारण स्थल, अग्निशमन व्यवस्था, स्टॉक और आसपास की आबादी की सुरक्षा भी जांची जा रही है?
पर्यावरण विभाग की सक्रियता पर सवाल
पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए पर्यावरण संबंधी नियमों के पालन की निगरानी भी जरूरी है। बेरियम युक्त प्रतिबंधित पटाखे, निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज वाले पटाखे, अत्यधिक धुआं पैदा करने वाले पटाखे, नियमों के विपरीत लड़ी/सीरीज तथा संदिग्ध ‘ग्रीन क्रैकर्स’ की बिक्री पर विशेष निगरानी की जरूरत है।
प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, अग्निशमन और पर्यावरण विभाग यदि संयुक्त रूप से बाजार का निरीक्षण करें तो नियमों के उल्लंघन की स्थिति सामने आ सकती है।
बड़ा सवाल
लाइसेंस किसके नाम, कारोबार कौन कर रहा है और प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? प्रशासन को दीपावली से पहले लाइसेंस, वास्तविक कारोबारी, स्टॉक और प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री—इन सभी बिंदुओं पर संयुक्त जांच करनी चाहिए।
