*थाने में IPS से बदसलूकी के आरोपों से लेकर जातिगत टिप्पणी तक… भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी पर भी fiR दर्ज*
*अनुपम वस्त्रालय प्रकरण ने लिया नया मोड़, आदिवासी समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक बयान पर पुलिस ने दर्ज किया अपराध*
रायपुर -अंबिकापुर-अनुपम वस्त्रालय प्रकरण से जुड़ा विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। पीड़िता के संबंध में कथित आपत्तिजनक सार्वजनिक टिप्पणी और अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर कथित अपमानजनक बयान के मामले में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ पुलिस ने FIR क्रमांक 0015/2026 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, एक अन्य मामले में भाजपा नेता धीरज सिंह के खिलाफ भी गाली-गलौज, जातिगत टिप्पणी और धमकी के आरोप में FIR क्रमांक 0702/2026 दर्ज की गई है।
रवीन्द्र तिवारी पर SC/ST एक्ट समेत गंभीर धाराएं
शिकायतकर्ता सुनीता सोनहा सहित विभिन्न संगठनों की ओर से 15 सितंबर को शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने के दौरान रवीन्द्र तिवारी ने अनुपम वस्त्रालय प्रकरण की पीड़िता के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की। साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर भी कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की गई, जिसे शिकायतकर्ताओं ने अपमानजनक बताया।
पुलिस ने मामले में SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(u), 3(1)(w-ii), 3(2)(va) के साथ BNS की धारा 196(1) और 353(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। अब पुलिस कथित बयानों, उनके संदर्भ और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी।
अनुपम वस्त्रालय प्रकरण से गरमाया था माहौल
अंबिकापुर के स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय से जुड़ा विवाद पहले से ही चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 11 अगस्त 2026 की घटना को लेकर सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 0563/2026 के तहत BNS की धारा 74 एवं 351(3) में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पीड़िता के समर्थन में सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई और कथित बयानबाजी को लेकर कार्रवाई की मांग की।
धीरज सिंह पर भी FIR, जातिगत टिप्पणी और धमकी के आरोप
इधर, कलेक्ट्रेट मैदान के पीछे गेट के पास कथित गाली-गलौज, जातिगत टिप्पणी और धमकी के मामले में भाजपा नेता धीरज सिंह के खिलाफ भी अंबिकापुर पुलिस ने FIR क्रमांक 0702/2026 दर्ज की है।
शिकायतकर्ता आकांक्षा टोप्पो की शिकायत के आधार पर पुलिस ने BNS की धारा 296, 351(1), 78(1) तथा SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r-s) के तहत अपराध दर्ज किया है।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
दोनों मामलों में FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस विवेचना महत्वपूर्ण हो गई है। कथित घटनाओं के दौरान क्या कहा गया, किस परिस्थिति में कहा गया और आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य मौजूद हैं—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।
FIR दर्ज होना दोष सिद्धि नहीं है। आरोपों की वास्तविकता और किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी पुलिस जांच, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
दो FIR से सियासी हलकों में हलचल
अंबिकापुर में एक ही विवाद से जुड़े घटनाक्रम में भाजपा नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब पुलिस जांच की दिशा, सामने आने वाले साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयानों पर निगाहें टिकी हैं।
