निरतु और कुकुरदी कला में सीमांकन पूरा, पांच साल के लिए आवंटन; निगरानी के दावों के बीच खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर नजर
बिलासपुर। जिले में दो नए रेत घाटों की नीलामी के साथ रेत उत्खनन का दायरा बढ़ने जा रहा है। जिला खनिज शाखा से मिली जानकारी के अनुसार, तखतपुर विकासखंड के ग्राम निरतु और मस्तूरी विकासखंड की पचपेड़ी तहसील अंतर्गत ग्राम कुकुरदी कला में रेत घाटों का आवंटन किया गया है। इनके शुरू होने के बाद जिले में कुल छह रेत घाट हो जाएंगे।
निरतु रेत घाट मंदिर हसौद निवासी अमित यादव को ऑनलाइन नीलामी के जरिए आवंटित किया गया है। यहां खनिज विभाग की टीम ने लगभग 3.80 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कर चिह्नांकन किया है। पंचनामा और प्रतिवेदन विभाग में जमा किए जा चुके हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक, घाट को पर्यावरण स्वीकृति भी मिल चुकी है।
वहीं, कुकुरदी कला में लगभग पांच हेक्टेयर भूमि पर रेत घाट संचालन के लिए कुरुद, जिला धमतरी निवासी श्रीमती मालती यादव को आवंटन किया गया है। इस घाट का भी सीमांकन, चिह्नांकन और पंचनामा संबंधी प्रक्रिया पूरी कर प्रतिवेदन विभाग में जमा किया जा चुका है। दोनों नए घाटों का आवंटन 159 रुपये प्रति घन मीटर की दर से किया गया है। इनकी लीज अवधि पांच वर्ष है।
पुराने चार घाट भी सूची में शामिल
जिले के पहले से आवंटित रेत घाटों में सोढ़ाकुर, अमलडीहा, करही कछार और उदयबंध शामिल हैं। निरतु और कुकुरदी कला के जुड़ने से जिले में कुल छह घाट हो जाएंगे।
निगरानी के दावों पर रहेगी नजर
खनिज विभाग का दावा है कि रेत घाटों की निगरानी सैटेलाइट के माध्यम से की जाती है। इसके अलावा अधिकारी मौके पर भौतिक निरीक्षण कर निर्धारित मापदंडों के पालन की जांच करते हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संचालक को नोटिस जारी किया जाता है और सुधार नहीं होने पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, रेत घाटों के संचालन में पारदर्शिता और नियमों के प्रभावी पालन को लेकर विभाग की निगरानी व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा अब होगी। नए घाटों के शुरू होने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि उत्खनन निर्धारित क्षेत्र और स्वीकृत शर्तों के अनुरूप हो। सैटेलाइट निगरानी और विभागीय निरीक्षण के दावों का असर कार्रवाई में कितना दिखाई देता है, इस पर भी नजर रहेगी।
