दीपावली से पहले जांच और कार्रवाई पर सवाल; क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव से संपर्क की कोशिश, नहीं मिला स्पष्ट पक्ष
अनिल शुक्ला की रिपोर्ट
बिलासपुर। नवरात्रि के बाद दशहरा और दीपावली की तैयारियों के बीच शहर में प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण और आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि रहवासी क्षेत्रों में स्थित कुछ स्थायी लाइसेंसधारी दुकानों में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पटाखे रखे गए हैं और वहां से छोटे व्यापारियों तक उनकी आपूर्ति की जा रही है। इन आरोपों के बीच क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय की सक्रियता और समय रहते जांच की पहल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारी से संपर्क की कोशिश, नहीं मिला स्पष्ट जवाब
प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण और उनसे होने वाले संभावित प्रदूषण के संबंध में बिलासपुर की क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव से कई बार संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उनसे यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि प्रतिबंधित पटाखों के मामले में पर्यावरण विभाग कब जांच करेगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्या कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, संपर्क के इन प्रयासों के दौरान उनका स्पष्ट पक्ष सामने नहीं आ सका।
ऐसे संवेदनशील मामले में संबंधित अधिकारी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, केवल संपर्क नहीं हो पाने के आधार पर किसी अधिकारी की निष्क्रियता या लापरवाही को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। कथित भंडारण की स्वतंत्र जांच और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
क्या उच्चस्तरीय आदेश के बाद ही होगी कार्रवाई?
विभागीय स्तर पर चर्चा के दौरान अधीनस्थ अधिकारियों की ओर से पुराने आदेशों का हवाला दिए जाने और उच्च स्तर से निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई की बात कहे जाने का आरोप है। यदि प्रतिबंधित पटाखों के भंडारण और आपूर्ति की शिकायतें मौजूद हैं, तो सवाल उठता है कि उनकी जांच के लिए संबंधित विभाग अपने स्तर पर क्या कदम उठा रहा है।
पटाखों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है। प्रतिबंधित उत्पादों की मौजूदगी की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में त्योहार के अंतिम दिनों तक इंतजार करने के बजाय समय रहते निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।
दीपावली से पहले जांच जरूरी
पटाखों से निकलने वाला धुआं और अत्यधिक ध्वनि आम नागरिकों, बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कथित भंडारण की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण और पर्यावरण विभाग के बीच समन्वय जरूरी है।
प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रतिबंधित पटाखों के भंडारण और आपूर्ति की जांच के लिए क्या व्यवस्था है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और शिकायतें मिलने पर जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी।
अब सवाल यह है कि प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण की जांच कब होगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई कौन करेगा? क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय की ओर से स्पष्ट जवाब और समयबद्ध जांच की जरूरत है, ताकि त्योहारों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें।
