
बिलासपुर, 22 अक्टूबर 2026।* ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर के प्रथम दिन राज किशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में राजयोग शिक्षिका बीके गायत्री दीदी ने साधकों को आत्म-पहचान, सकारात्मक चिंतन और मन की शांति का महत्व समझाया। शरीर शिथिलीकरण एवं राजयोग ध्यान के अभ्यास के माध्यम से उन्होंने स्वयं को शांत स्वरूप चैतन्य आत्मा के रूप में अनुभव करने की विधि बताई।*स्वयं को पहचानना ही आत्मिक विकास की पहली सीढ़ी*बीके गायत्री दीदी ने समझाया कि आत्मा भृकुटी के मध्य स्थित चैतन्य शक्ति है, जो शरीर के माध्यम से देखने, बोलने और सुनने का कार्य करती है। स्वयं को शरीर के बजाय आत्मा समझने से मन को स्थिर करने और अपने मूल गुणों को पहचानने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि दूसरों की कमियों को देखने के बजाय स्वयं के गुणों और शक्तियों को पहचानना सच्चे सुख का मार्ग है।उन्होंने प्रेरक प्रसंग तथा राजा दृष्टांत के माध्यम से आत्म-पहचान और श्रेष्ठ संस्कारों का महत्व बताया। सकारात्मक, नकारात्मक, आवश्यक और व्यर्थ—चार श्रेणियों में समझाते हुए उन्होंने कहा कि व्यर्थ एवं नकारात्मक विचारों में उलझने से मन अशांत होता है। आत्मा के सात मूल गुणों—सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति—का उल्लेख करते हुए साधकों को इन्हें जीवन में धारण करने की प्रेरणा दी।बीके मंजू दीदी के मार्गदर्शन में आयोजित इस सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर में राज किशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में बीके गायत्री बहन तथा टिकरापारा स्थित प्रभु-दर्शन भवन में बीके समीक्षा बहन साधकों को राजयोग ध्यान का अभ्यास करा रही हैं। शिविर का उद्देश्य लोगों को आत्म-पहचान, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है।दोनों सेवा केंद्रों पर प्रतिदिन सुबह 7:00 से 8:15 बजे तथा शाम 7:00 से 8:15 बजे तक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इच्छुक व्यक्ति अपनी सुविधा और नजदीकी के अनुसार किसी भी केंद्र पर पहुंचकर निःशुल्क शिविर का लाभ ले सकते हैं।**स्थान:** शिव-अनुराग भवन, राज किशोर नगर एवं प्रभु-दर्शन भवन, टिकरापारा, बिलासपुर।**समय:** प्रतिदिन सुबह एवं शाम 7:00 से 8:15 बजे तक। प्रवेश निःशुल्क।
