आदिकाल से ही एक ही सनातन धर्म चला रहा है फिर ऐसा क्या हुआ कि उस सनातन धर्म के अलावा भी अन्य धर्म सामने आए?
सम्पादकीय : सतयुग त्रेता युग द्वापर युग के बाद आया कलयुग इस कलयुग ने लोगों को ऐसा बांट दिया कि भाई-भाई अलग हो गए बाप -बेटा अलग हो गया दोस्त यार अलग हो गए आखिर ऐसा क्या हो गया ऐसा क्यों हुआ और अभी भी ऐसा क्यों हो रहा है?
अगर इसके पीछे जाएंगे तो बहुत सारी वजह हैं पर एक दो वजह जो है उन्हें में सामने रखना चाहता हूं पहली वजह जो मुझे समझ में आती है वह है धर्म आज कई धर्म सामने हैं वह उसमें भी कई पंथ आ गए हैं उसकी वजह से लोग भी बंटते जा रहे हैं आप जिस धर्म को मानते हो जिस पंत को मानते हो मानो हमें कोई तकलीफ नहीं है पर अधिकांश लोग अपने सनातन धर्म हिंदू धर्म को भूलते जा रहे हैं अपने इष्ट देव भगवान सांई झूलेलाल को क्यों भूलते जा रहे हैं क्यों आज समाज में भी धर्मांतरण होने लगा है क्यों आज हमारे लोग अपना धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपना रहे हैं इसकी प्रमुख जो बातें समझ में आती है वह है बीमारी, दूसरा पैसे की कमी और कमजोर वर्ग के लोग हैं वह पैसे के लालच में धर्म छोड़कर जा रहे हैं वह जो मध्यम वर्ग के लोग हैं परिवार में किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने पर उन्हें अपने समाज में आने के लिए उनके मन को डिवाइड करते हैं और उनके मन में यह धारणा भर देते हैं कि तुम्हारा भगवान या तुम्हारा पंथ तुम्हारा गुरु इतना प्रभावशाली नहीं है इसलिए तुम को ठीक नहीं कर पा रहा है हमारा भगवान हमारा प्रभु बहुत शक्तिशाली है ऐसा बोलकर
और उनके मन को डिवाइड करके अपने धर्म का प्रभाव डालकर धर्म परिवर्तन की राह पर ले जा रहे हैं विगत कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, जैसे प्रदेशों में बड़ी तादाद में समाज के लोग धर्म परिवर्तन करके अन्य धर्म में चले गए तो यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा
जिस धर्म की रक्षा के लिए जिस धर्म के खातिर हमने अपना घर बार छोड़ा धन दौलत छोडी अपनी जन्मभूमि छोड़ी आज चंद रुपयो के लिए और कुछ लोगों के बहकावे में आकर धर्म परिवर्तन कर रहे हैं क्या यह उचित है ?
मेरे ख्याल से यह बिल्कुल अनुचित है आप कोई भी ग्रंथ, गीता ,भागवत, रामायण, खोल कर देख लीजिए पढ़ लीजिए सब का एक ही सार होगा जो व्यक्ति अपने धर्म का ना हुआ वह किसी और का क्या होगा और जिस धर्म में व्यक्ति पैदा हुआ है उसी धर्म का पालन करें और उसी धर्म में ही अगर वह मृत्यु को प्राप्त कर परलोक चला जाता है और विधि विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार होता है तभी उसकी आत्मा को शांति मिलती है हम किसी भी धर्म को छोटा या बड़ा नहीं बोल रहे हैं सभी धर्म सम्मानीय हैं अपनी अपनी जगह में सभी बड़े हैं पर सबसे पुराना अगर कोई धर्म है तो वह है हिंदू धर्म सनातन धर्म
उसी धर्म ने ही हम सब को बांधकर रखा है सनातन धर्म में हमेशा यह सिखाया है सब से प्यार करो, सब का सम्मान करो ,सबसे मिल जुल कर रहो, ऐसे महान धर्म को छोड़कर अगर आज कोई अन्य धर्म अपनाता है तो वह सबसे बड़ा अज्ञानी और महामूर्ख है उसे सही नहीं ठहरा जा सकता हैं।
अगर बच्चा बीमार होता है तो आप डॉक्टर बदल सकते हो अगर खाना पसंद नहीं है तो खाना बदल सकते हो पर धर्म को नहीं बदल सकते धर्म कोई कपड़ा नहीं है कोई व्यापार नहीं है इस गंभीर विषय के ऊपर आज समाज के वरिष्ठजन , जनप्रतिनिधि समाज के मुखी जन, एवं समाज के सम्माननीय सदस्य जन आखिर मौन क्यों हैं?
क्या कारण है कि इस विषय पर चर्चा नहीं कर रहे हैं या इसे रोकने के लिए कोई उपाय क्यों नहीं किया जा रहा है यह सिर्फ एक घर एक मोहल्ला एक नगर एक शहर की बात नहीं है यह पूरे देश भर में रहने वाले हमारे समाज की बात है अपना अस्तित्व बचाने की बात है। हमारे समाज की सिंधी बोली, तो हमारी ऐसी चली गई अब हम सिंधी लिख नहीं सकते और धीरे-धीरे नई जनरेशन जो आ रही है वह अब सिंधी बोलना नहीं चाहती है और हम इसके प्रति गंभीर भी नहीं है उन्हें बोलते भी नहीं है धीरे-धीरे खान-पान संस्कृति भी विलुप्त होते जा रही है अब बचा हमारा धर्म वह भी अगर इसी तरह लोग धर्मांतरण करते रहेंगे तो क्या बचेगा हमारे पास फिर हमारे बड़े बुजुर्ग जो सब कुछ छोड़ कर आए थे इतना त्याग बलिदान दिया किसके लिए दिया।
भगवान झूलेलाल ने अवतार लिया किसके लिए लिया अभी भी वक्त है इस विषय पर सोचना होगा और सबको मिलकर कार्य करना होगा वह इस धर्मांतरण को रोकना होगा और जो धर्म परिवर्तन कर चले गए हैं उन्हें वापस अपने धर्म में लाना होगा नहीं तो हमारे पूर्वज कभी भी हमें माफ नहीं करेंगे और उनकी आत्मा हमेशा तड़पती रहेगी क्या आप यह चाहते हो कि ऐसा हो अगर नहीं तो इस मुद्दे पर एक राष्ट्रीय बैठक बुलाई जाएं एवं पूरे समाज की और इसकी वजह जानकर इसका कारण पता करके उसे दूर किया जाए
अपने लोगों को वापस अपने धर्म में लाया जाए कुछ स्वार्थी लोग ऐसा कर रहे हैं क्या कभी किसी भगवान ने किसी अन्य धर्म के भगवान को अपने धर्म में मिलाया है क्या या किसी ग्रंथ में ऐसा लिखा है क्या?
यह कुछ स्वार्थी लोग हैं जो बहला-फुसलाकर लोगों को धर्म परिवर्तन करा रहे हैं ऐसा कर वे अपने धर्म का भी अपमान कर रहे हैं ऐसे पापी लोगों से दूर रहें ।
एवं अपने धर्म में रहकर ही अपना जीवन व्यतीत करें अपना धर्म ही सबसे सर्वोपरि है और सनातन धर्म हिंदू धर्म सबसे महान धर्म है और हमें गर्व होना चाहिए कि हम हिंदू हैं हम सनातन धर्म के वंशज हैं
जिस धर्म में भगवान राम श्री कृष्ण एवं अनेक देवी देवताओं ने अवतार लिया।
किसके लिए लिया हम लोगों के लिए लिया अभी भी वक्त है इस धर्म परिवर्तन को रोकना होगा और अपने लोगों को वापस लाना होगा