बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित मार्क अस्पताल में इलाज को लेकर गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। पथरी के ऑपरेशन के बाद महिला मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, वहीं स्टेंट से जुड़ी गड़बड़ी के आरोपों को लेकर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। मामला उजागर होने के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरबा निवासी स्वाति राजपूत को पथरी की समस्या के चलते लगभग एक माह पूर्व बिलासपुर रेफर किया गया था। परिजनों ने उन्हें सरकंडा स्थित मार्क अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर पेट में स्टेंट डाले जाने की जानकारी दी।
आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के तुरंत बाद ही स्वाति को असहनीय दर्द और अन्य गंभीर समस्याएं शुरू हो गईं। लगातार परेशानी बढ़ने पर परिजन एक माह बाद उसे दोबारा उसी अस्पताल लेकर पहुंचे। इस दौरान डॉक्टरों ने स्टेंट के पेट में मौजूद न होने की बात कहकर अन्यत्र इलाज कराने की सलाह दे दी।

परिजनों का आरोप है कि स्टेंट निकालने के नाम पर मरीज के टांके खोल दिए गए, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बाद परिजन गंभीर हालत में स्वाति को नागपुर के एक बड़े अस्पताल ले गए, जहां फिलहाल उसका इलाज जारी है।
पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।