विजय की ✒कलम

बिलासपुर :- एक कहावत बहुत पुरानी है राजनीतिक में उस समय कांग्रेस शासन था इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी तब यह बहुत प्रचलित हुआ था की कुर्सी जरूरी है इंदिरा गांधी मजबूरी है? अब यह एक स्लोगन था कि विपक्ष वालों का एक वोट पाने की राजनीतिक थी हकीकत क्या है नहीं पता पर यह बात सुनने में बहुत आती थी अब ऐसी एक कहावत बिलासपुर मैं भी चल पड़ी है समाज में की कुर्सी जरूरी है पीके तानाशाह मजबूरी है ?
कहने का मतलब है की तानाशाह हमारी मजबूरी है क्योंकि हमें कुर्सी चाहिए कुर्सी के मोह के कारण पीके की तानाशाही सहन कर रहे हैं?
और अपने जमीर को मार कर अपनी आत्मा का गला घोट कर सच को छुपा कर झूठ की जय जय कार कर रहे हैं?
कई लोग मुझसे मिलते हैं कहते हैं कि भाई तू लिखता सच है बोलना सच है पर क्या करें हमारी भी मजबूरी है तानाशाह जरूरी है?
मैंने कहा कि भाई ऐसे भी क्या लालच है कुर्सी की की कुर्सी के बिना तुम रह नहीं सकते हो क्या तुम मछली हो जो पानी के बिना जी नहीं सकते हो?
इंसान हो इंसान बन के रहो धर्म कर्म के कार्य करो बड़े-बड़े फोटो लगाने से घर में और दुकान में गुरु का कुछ नहीं होता गुरु के यहां जाने से सत्संग सुनने से कुछ नहीं होगा जब तक उस पर अमल नहीं करोगे तब तक आपका जीवन और यह लोक व परलोक अंधकार में रहेगा कुर्सी आज है कल नहीं रहेगी पर अच्छे कर्म करने से मरने के बाद भी लोग याद करेंगे तो काम वह करो जिसमें समाज का भी भला हो देश का भी भला हो और आपका आने वाली पीढ़ी का भी भला हो ,चद नोटों की गडी व कुछ समय कुर्सी का मोह आपको अंधकार की ओर ले जा रहा है जिससे आप तो डूब रहे हो लेकिन साथ में समाज के लोग भी अंधकार में जा रहे हैं आने वाले पीढ़ी भी अंधकार में खो जाएगी अब यह 2025 का अंतिम समय है चालिहा महोत्सव का भी अंतिम दिन है तो इस अंतिम दिन में अच्छा कार्य करके ,जो सच है बोल कर जाओ और सच की राह में चलने की कसम खाकर आगे बढ़ो की नये साल की पहली किरण पहले सुबह हम सच बोलेंगे धर्म की राह पर चलेंगे और पीके की तानाशाही चलने नहीं देंगे ? 2025 में जो भी जाने अनजाने में पाप हुआ है गलतियां हुई है उन सब को सुधार करने का अंतिम अवसर अंतिम दिन आपको मिल रहा है नए साल की सुबह सच के साथ धर्म के साथ न्याय के साथ इंसाफ के साथ करें यही संदेश अपने परिवार में अपने समाज को भी दे कि हम किसी से भेदभाव नहीं करेंगे उच्च नीच नहीं करेंगे अमीरी गरीबी नहीं करेंगे धोखा फरेब विश्वास घात नहीं करेंगे झूठ नहीं बोलेंगे सत्य की राह पर चलेंगे और ईमानदारी से कार्य करेंगे जीवन का कोई भरोसा नहीं कब बुलावा आ जाए और नींद में ही मौत हो जाए ?
इससे पहले ही अच्छे कार्य करके विदा ले, भगवान के चरणों में पहुंचे तो सर उठाकर भगवान से बात करें गलत राह पर गलत कार्य करने के लिए आपको हजार आदमी मिलेंगे पर सत्य की राह पर चलने का मार्ग दिखाने वाला कोई विरला ही मिलेगा समय की पुकार भी यही है धर्म नया नीति भी यही कहती है कि
(आ अब लौट चले अपने बड़े बुजुर्गों के आदर्शों पर)
जो उन्होंने हमें सिखाया था खाली हाथ आए थे खाली हाथ गए पर एक स्थान व एक मुकाम लोगों के दिलों में बना कर गए जिसे आज तक कोई गिरा नहीं पाया है ओर कोई गिरा नही पाएगा, अपने बच्चों के लिए भी घर दुकान प्रॉपर्टी बना कर गए पर ईमानदारी से रोटी खाई और सबको खिलाई सत्य की रहा धर्म की रहा पर चले और आज भी याद किए जाते हैं समाज को आगे बढ़ाने का कार्य किया, धर्मशाला बनवाएं ताकि धर्म के कार्य हो सके आजकल नाम भगवान का लेते हैं और पाप खुद करते हैं मुंह में राम बगल में छुरी रखते हैं ऐसे लोगों से सावधान रहें ये तो खुद का सर्वनाश करते हैं साथ में अपने अगल-बगल वालों और साथ में चलने वाले लोगों का भी सर्वनाश करने का कार्य करते हैं एक फिल्म आई थी नाम जीसमें पंकज उदास का एक गीत था जो बहुत मशहूर हुआ था और आज भी जब सुनते हैं तो आंखों से आंसू आ जाते हैं चंद रुपए कमाने के लिए फिल्म का हीरो संजय दत्त दुबई जाता है और वहां पर पैसे के चक्कर में गलत रहा में चला जाता है फस जाता है तब उसे घर की याद आती है मां की याद आती है अपने देश की याद आती है अपने लोगों की याद आती है और वह गीत था
(चिट्ठी आई है चिट्ठी आई है वतन की चिट्ठी आई है मिट्टी आई है बड़े दिनों के बाद लंबे इंतजार के बाद वतन की मिट्टी आई है मां की चिट्ठी आई है)
पूरा गीत सुनने के बाद कई लोगों से आंखों से आंसू बह गए थे फिल्म में तो थे हकीकत में भी जब यह गाना सुनते थे और देखते थे फिल्म में तब आंखों से आंसू आ जाते थे वह बोल दिल को छूते थे और सच को बयां करते थे,
इसके आगे बोल थे पैसा खूब कमाया अब वापस आ जा अपने वतन आ जा अपनी मां के पास आ जा अपने लोगों के पास आ जा तो मेरा भी वही कहना है पैसा आपने खूब कमाए अब वापस आ जाओ अपने आदर्शों पर सत्य की राह पर धर्म की राह पर
एक वादा करो अपने आप से नए साल में सच बोलेंगे सत्य की राह पर चलेंगे धर्म के कार्य करेंगे समाज को एक नई दिशा देंगे युवाओं को नहीं रहा दिखाएंगे कुर्सी के मोह में नहीं पड़ेंगे गलत राह पर नहीं जाएंगे अपने इष्ट देव भगवान भोलेनाथ कुलदेवी हिंगलाज माता और आराध्य देव भगवान झूलेलाल की जय जयकार करेंगे घर-घर पहुंचाएगे
संपादकीय
